For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल - कैसे कोई ख़ुश रहे जब दिल ही में आज़ार हो तो

2122 2122 2122 2122

इक भी आंसू क्यों गिरे जब आंख शोला-बार हो तो
कैसे कोई ख़ुश रहे जब दिल ही में आज़ार हो तो

आपसे है जंग तो मंज़ूर है ये सरफ़रोशी
क्या करें जब आपके ही हाथ में तलवार हो तो

लग रही है ज़िंदगी भी कुछ दिनों से अजनबी सी
लौट आना तुमको मुझसे थोड़ा सा भी प्यार हो तो

क्या किसी के सामने अब राज़े-ज़ख़्मे-पिन्हां खोलें
आपका ग़म-ख़्वार ही जब दुश्मनों का यार हो तो

तूने गरचे तोड़ डाले सारे नाते एक पल में
एक वहशी को तिरा गर आज भी इंतिज़ार हो तो?

© मौलिक व अप्रकाशित

Views: 300

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 10, 2021 at 9:28am

बढ़िया ग़ज़ल कही भाई यमित जी...आदरणीय कबीर साहब की इस्लाह हमेशा कुछ सिखाती है।मुझे '"तो" शब्द भर्ती का लग रहा है।इसके बगैर ग़ज़ल में रवानगी अच्छी आएगी।

Comment by Samar kabeer on September 30, 2021 at 3:50pm

जनाब यमित पुनेठा जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I 

'इक भी आंसू क्यों गिरे जब आंख शोला-बार हो तो
कैसे कोई ख़ुश रहे जब दिल ही में आज़ार हो तो'

मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है ग़ौौर करें I 

'क्या किसी के सामने अब राज़े-ज़ख़्मे-पिन्हां खोलें
आपका ग़म-ख़्वार ही जब दुश्मनों का यार हो तो'

इस शैर के सानी मिसरे में 'आपका  की जगह 'अपना' शब्द चाहिए, इस हिसाब से मिसरा बदलने का प्रयास करें I 

'एक वहशी को तिरा गर आज भी इंतिज़ार हो तो'

ये मिसरा बह्र में नहीं है, देखिएगा I 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
1 minute ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
18 minutes ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
21 minutes ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"प्यादा एक बिम्ब है जो समाज के दरकिनार लोगों का रूप है। जिसके बिना कोई भी सत्ता न कायम हो सकती है न…"
28 minutes ago
आशीष यादव commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश जी नमस्कार । बढ़िया छंद रचा गया है।  हार्दिक बधाई।"
35 minutes ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय सुशील जी, जीवन के यथार्थ को दिखाते दोहे बेहतरीन बने हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
39 minutes ago
आशीष यादव commented on vijay nikore's blog post प्यार का पतझड़
"कुछ चीज़ों को जब कहना मुश्किल हो जाता है तब वह कविता बनकर सामने आ जाती है। एक बेहतरीन कविता पर बधाई…"
59 minutes ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक भावपूर्ण मर्मस्पर्शी कविता पर आपको बधाई।  आदरणीय Saurabh Pandey जी की टिप्पणी ही इस कविता…"
1 hour ago
आशीष यादव commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post कविता
"इस पटल पर प्रकाशित होने के 6 साल बाद इस कविता को पढ़ रहा हूं। भावों को गीत बना देना, कविता बना देना…"
1 hour ago
आशीष यादव commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post ग़ज़ल
"जो भी बोलना चाहा आपने अच्छा बोला। बाकी कमी बेसी आदरणीय उस्ताद जन बोलना चाहेंगे।"
1 hour ago
Awanish Dhar Dvivedi commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post ग़ज़ल
"सर नमस्कार मुझे ग़जल का ज्ञान नहीं है  अरकान आदि को नहींं जानता हूँ। बस भव में कुछ लिख देता हूँ।"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ जैसे मंच की ये स्थिति अत्यंत कष्टप्रद है। अपने स्वास्थ्य और पारिवारिक विवशताओं , व्यस्ततओं…"
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service