For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

(1)

ताला बंदी बाद अब, देखो थोड़ी छूट।

भीड़ दिखे अब शहर में, नियम रहे हैं टूट

(2)

घटा घिरी घनघोर अब, मन घट धरे न धीर।

आओ प्रियतम जल्द तुम, तभी मिटे मम पीर॥ 

( 3)

अन्य चुनावों से अधिक, रखना पड़े बचाव।

पंचायत के जब निकट, आने लगें चुनाव॥ 

(4)

अंकुश वाणी कलम पर, करें न अनुचित बात । 

इसमें ही जग का भला , यह ही जग विख्यात ॥

(5)

अंतर में पीड़ा धरे , ओंठन से मुस्काय ।

ऐसे नारी हृदय की, थाह कौन ले पाय॥

मौलिक ,अप्रकाशित 

Views: 538

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on July 17, 2021 at 4:05pm

जनाब ओमप्रकाश शर्मा जी आदाब, दोहों का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

गुणीजनों की बातों पर ध्यान दें ।

Comment by Om Parkash Sharma on July 14, 2021 at 11:17pm

आदरणीय Chetan Prakash जी नमन क्या शीघ्र के स्थान पर जल्द कर देने से दोष निवारण हो जाएगा। मार्गदर्शन करने की कृपा करें।

Comment by Chetan Prakash on July 14, 2021 at 3:57pm

नमन, आदरणीय, दोहा छंद पर आपका अपेक्षाकृत बेहतर प्रयास है ! किन्तु बंधु, दूसरे दोहे का तीसरा  चरण, आओ प्रियतम शीघ्र  तुम" पुन: देखें ! चौदह  मात्राए हैं ! सादर  

Comment by Om Parkash Sharma on July 14, 2021 at 2:13pm

Saurabh Pandey जी नमन , 

 आपके परामर्श पर, होगा दोहा तैयार।

 थोड़ा वाचिक यगण पर, मिले  विस्तृत विचार॥ 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 14, 2021 at 11:48am

उत्तम दोहे छंद ये, इनके फलक अनंत  !

विषम चरण हित जानिए, वाचिक यगण न अंत 

आदरणीय ओमप्रकाश शर्मा जी, आपने दोहों पर बढ़िया प्रयास किया है. हार्दिक शुभकामनाएँ  .. 

उपर्युक्त सुझाव पर अवश्य ध्यान दीजिएगा. 

शुभ-शुभ

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service