For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अकस्मात गांव में भीड़ बढ़ गई। कालू, खखनु आदि ही नहीं शंकर सेठ वगैरह भी सपरिवार गांव आ गए हैं।सुना है और लोग भी आनेवाले हैं। अभी कुछ दिनों तक ये सब यहीं रहेंगे। बुधु यह सोचकर परेशान है कि जो लोग खास मौकों पर भी गांव आने से कतराते थे,वे आज धड़ल्ले से क्यों मुंह उठाए भागे आ रहे हैं,वो भी पूरे बाल बच्चों के साथ।कहते थे कि इनके बच्चे एसी कूलर के बिना सो नहीं सकते।बिजली के बिना क्या तो, रोने लगते हैं।अब यह कौन करिश्मा हुआ है भाई?

यही सब सोचते वह पोखर से लौट रहा था कि लक्खू मास्टर जी मिल गए।बुधु ने उन्हें नमस्ते कर सवाल ठोका,
" मास्टर जी, इ सब गांव का परदेशी लोग भाग भाग कर गांव काहे आ रहे हैं?"
" बुधु,उनका भी घर यहीं है न।"मास्टर जी ने जवाब दिया।
" पर ऐसा तो पहले पहल दिखाई दे रहा है,सर जी।ऐसा क्यों?"
" संकट में घर ही याद आता है,बबुआ।"
" संकट?कैसा संकट? अरे मास्टर जी जब गांव बहुत पहले बाढ़ की चपेट में आ गया था,तब ये सब लोग कहां थे? सरकारी अनाज बंटता था।"बुधु बोला।
" सही कहते हो बुधु।तुम्हें याद है सन् इकहत्तर की वह बाढ़?"मास्टरजी ने पूछा।
" जी,तब हमलोग बच्चे थे।पानी पानी खेलने गए थे,जब पहले दिन पानी आया था।"
" अरे वाह!तुमको तो सब याद है।"
"....और यह भी कि रिलीफ के गेहूं के बंटवारे में धांधली कर दो क्विंटल गेहूं बचाकर ठाकुरबाड़ी में रखा हुआ था।शिकायत पर अधिकारी,पुलिस वाले आए थे।तब के सीधे सादे मुखिया जी ने कहा था कि सरपंच साहेब बोले कि दुर्गा जी के नाम पर रख लेते हैं। मिल - बांटकर खा लेंगे।"
"...हाहहाहा!!!!!शंकर सेठ के चाचा ही सरपंच थे।"लक्खू मास्टर ठहाका लगाकर हंसे।
" जी। लोग भी हंसते थे,मास्टर जी।हमलोग भी कहते,मिल - बांटकर खा लेंगेऔर हंसते भी।"
" अच्छा जाने दो।ये तब की बातें हैं।अपने बारे में यह सब सुनकर बिशु मुखिया भी हंसते ही थे।अब के जैसे नहीं कि चोरी और ऊपर से सीनाजोरी भी।"
" जी।तो अब का संकट क्या है?"बुधु ने जानना चाहा।
" अरे वही कोरोना वाला मेरे भाई। और क्या?"मास्टर जी जल्दी से बोले।
" तो इसमें गांव आने से क्या होगा।"
" दूरी,मेरे भाई।एक दूसरे से दूरी बनाकर रहना जरूरी है।ऐसा सरकार ने सुझाया है।" लक्खू जी बोले।
" अच्छा तो इ सब दूरी बनाने के लिए इतनी दूर से भागे आ रहे हैं? पहले तो दूर गए कि जो गांव से जितनी दूर,उतना बड़ा गिना जाएगा।और अब......घुसर गई सारी हेंकड़ी?" बुधु ने अकड़कर कहा।
" गांव घर उनका भी है,बुधु।ऐसा नहीं कहते।"
" ठीक है।पर इनकी जांच हुई क्या? इ सब तालाबंदी में शहर से आ रहे हैं कि गांव में फंफराह(कम आबादी वाली)जगह मिलेगी।चलिए प्रधान जी से कहेंगे कि पहले इनकी भी जांच हो जाए।"
" जरूर बुधु,जरूर। चलो हम अभी चलते हैं।" मास्टर जी बोले।
"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 215

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। सुझावों के बाद यह और बेहतर हो गयी है। हार्दिक बधाई…"
22 minutes ago
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"वक़्त बदला 2122 बिका ईमाँ 12 22 × यहाँ 12 चाहिए  चेतन 22"
2 hours ago
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"ठीक है पर कृपया मुक़द्दमे वाले शे'र का रब्त स्पष्ट करें?"
3 hours ago
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी जी  इस दाद और हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत…"
3 hours ago
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"बहुत बहुत शुक्रिय: आपका"
3 hours ago
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय "
3 hours ago
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"बहुत बहुत शुक्रिय: आदरणीय "
3 hours ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आदरणीय अमीर जी सादर प्रणाम । बहुत बहुत बधाई आपको अच्छी ग़ज़ल हेतु । कृपया मक्ते में बह्र रदीफ़ की…"
3 hours ago
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आदरणीय DINESH KUMAR VISHWAKARMA जी आदाब  ग़ज़ल के अच्छे प्रयास के लिए बधाई स्वीकार करें। जो…"
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आदरणीय 'अमित' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
4 hours ago
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी जी आदाब। इस उम्द: ग़ज़ल के लिए ढेरों शुभकामनाएँ।"
4 hours ago
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आदरणीय Sanjay Shukla जी आदाब  ग़ज़ल के अच्छे प्रयास पर बधाई स्वीकार करें। इस जहाँ में मिले हर…"
4 hours ago

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service