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"अत्यंत सुंदर लिखा है। सच्चाई बयाँ किया है आपने"
Apr 8, 2019

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kavitao ke madhyam se bhawnao ko vykta karne ki koshish

Anamika ghatak's Blog

सब कहते हैं...

सब कहते हैं शहर में भी सहर होता है
पर शहर में बसर कहाँ बशर होता है

दूर दूर जहाँ तक नज़र जाती है
धुँआ धुँआ शहर ये ज़हर ढोता है

दाग़ ग़ालिब का ये जो पुराना शहर है
बात बात में गालियों का हर्जाना भरे है

क्या हो गया है इस नए ज़माना ए नस्ल को
रिश्तों को सरेआम सरेबाज़ार करे हैं

शब ओ सहर ए उजाला ए फ़साना
शहर ए ग़म की कहानी कहे है

क्या कहूँ अब किस्सा ज़िंदगी का
सब अपनी अपनी कहानी कहे हैं

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

Posted on November 11, 2017 at 11:04am — 5 Comments

तृष्णा

इन बारिश की बूंदों को
तन से लिपटने दो
प्यासे इस चातक का
अंतर्मन तरने दो
बरसो की चाहत है
बादल में ढल जाऊं
पर आब-ओ-हवा के
फितरत को समझने दो
फिर भी गर बूंदों से
चाहत न भर पाए
मन की इस तृष्णा को
बादल से भरने दो

Posted on June 14, 2012 at 8:00pm — 4 Comments

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At 11:48am on August 22, 2012, Sanjay Rajendraprasad Yadav said…
"बहुत सुन्दर, विरह के शर्द- दर्द है इसमे.... अनामिका जी बधाई आपको............!!!!  
At 9:06pm on January 3, 2012, Admin said…

 
 
 

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