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Delhi
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Azamgarh(U.P)
Profession
lawyer
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Alka tiwari's Blog

विश्वास

विश्वास
ढके शब्दों में नंगे हमाम पर लिखेंगे ,
समय थम कर पढ़ेगा इतना प्राणवान लिखेंगे,
हमने जब ठाना तो तस्वीर का रुख बदलकर माना,
हम सोच का एक स्रोत है, जब भी निकले अपनी जगह बना के माना
कुछ इतना खास कर गुजरेंगे ,
जब सचे-सच्चे अहसास शब्दों में ढालेंगे ,
हम वो जड़ है, जब चाहा तभी जड़ हुए ,जब चाहा जड़ कर दिया
बंद शब्दों में खुले आसमान पर लिखेंगे.
अलका तिवारी

Posted on November 4, 2010 at 2:01pm — 5 Comments

कविता

अन्तर्ध्वन्द

अमर प्रेम के अंकुर को ,
संकोच और अनजानी धूप ने,
यूँ झुलसाया,
पतझड़ आने को बौराया है,
मन बसंत में उलझा है,
उम्र ढलने को आई,
मन यौवन में अटका है,
संस्कार,मर्यादा,मान,परिधि,
सब पीछे छूटा,
मन विकल हो भागा,
रिश्ते नातों के फंदों से,
बुन गया यौवन सारा,
जब सबसे मुक्त हुआ,
मन बंधने को भागा........

अलका तिवारी

Posted on September 23, 2010 at 11:00am — 3 Comments

कविता

अधीरता

व्यग्र हो अधीर हो,कौतुक हो जिज्ञाशु हो ,
जोड़ ले पैमाना उत्थान का,
घटा ले पैमाना पतन का,
हुआ वही जो होना था,
होगा वही जो तय होगा,
परिणिति शास्वत विनिश्चित है ,
ईश्वरीय परिधि में,
मानवीय स्वाभाव न बदला है,न बदलेगा,
होगा वही जो होना है, शाश्वत युगों से.

....अलका तिवारी

Posted on September 16, 2010 at 3:35pm — 7 Comments

रंगीन आतंकवाद

रंगीन आतंकवाद





'जननी जन्म भूमिष्च स्वर्गादपि गरीयसि' कि भावना से ओत-प्रोत एक युवा, सन्यासी,स्वामी विवेकानंद ने शिकागो कि धरती पर विश्व धर्म सम्मेल्लन में अपने व्याख्यान का प्रारंभ "DEAR SISTER AND DEAR BROTHER ...." से करके पूरी दुनिया में विश्व बंधुत्व के भाव से हिंदुस्तान का परचम लहराने वालI सन्यासी उस समय अपने भगवा वस्त्र में हिदुस्तान का मुकुट बना चमक रहा था,जिसे याद करके आज भी करोनो युवा उत्साह और स्फूर्ति व् नए उमंग से भर जाते हैं. उस सन्यासी, युवा को क्या पता था कि आगामी… Continue

Posted on September 1, 2010 at 5:42pm — 3 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 2:38am on July 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

At 9:38am on November 4, 2010, Admin said…
इन्तजार के उपरांत आपकी कविता "अजोर क अगोर" प्रबंधन स्तर से भोजपुरी साहित्य ग्रुप मे पोस्ट कर दी गई है | आप नीचे दिये लिंक पर देख सकती है |
http://www.openbooksonline.com/group/bhojpuri_sahitya/forum/topics/5170231:Topic:31082
At 10:22pm on October 30, 2010, Admin said…
आदरणीया अलका तिवारी जी,
सादर अभिवादन,
आपका एक ब्लॉग "अजोर क अगोर" अनुमोदन हेतु प्राप्त हुआ है जो भोजपुरी रचना है, भोजपुरी रचना के लिये OBO पर एक अलग ही "भोजपुरी साहित्य" ग्रुप बनाया गया है, इसे कृपया उक्त ग्रुप मे पोस्ट कर दे, सुविधा हेतु ग्रुप का लिंक नीचे दे रहा हूँ |
http://www.openbooksonline.com/group/bhojpuri_sahitya
धन्यवाद,
आपका
एडमिन
OBO
At 11:40pm on August 17, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 4:25pm on August 14, 2010, ABHISHEK TIWARI said…
welcome in the family of open books online ,we r thanks full be a part of this
At 11:53am on August 13, 2010,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…

At 10:01pm on August 12, 2010, Admin said…

At 10:01pm on August 12, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

 
 
 

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Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. अमीरुद्दीन जी। हार्दिक बधाई प्रेषित है। "
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