For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Azeez Belgaumi
  • Bangalore Karnataka
  • India
Share

Azeez Belgaumi's Friends

  • Shashi Mehra
  • Tapan Dubey
  • rajendra kumar
  • Tilak Raj Kapoor
  • रंजना सिंह
  • Abhay Kant Jha Deepraaj
  • harkirat heer
  • Bhasker Agrawal
  • Lata R.Ojha
  • Harjeet Singh Khalsa
  • Akshay Thakur " परब्रह्म "
  • Shanno Aggarwal
  • Roli Pathak
  • Anita Maurya
  • Sudhir Sharma
 

Azeez Belgaumi's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Bangalore Karnataka
Native Place
Belgaum
Profession
Self Employed
About me
An urdu Poet

Azeez Belgaumi's Photos

  • Add Photos
  • View All

Azeez Belgaumi's Blog

GAZAL BY AZEEZ BELGAUMI

अहबाब ऐतबार के काबिल नहीं रहे

ये कैसे सर हैं ..! दार के काबिल नहीं रहे



जज़्बात इफ्तेखार के काबिल नहीं रहे

अब नवजवान प्यार के काबिल नहीं रहे



हम बेरुखी का बोझ उठाने से रह गए

कंधे अब ऐसे बार के काबिल नहीं रहे



ज़ागो ज़गन तो खैर, तनफ्फुर के थे शिकार

बुलबुल भी लालाज़ार के काबिल नहीं रहे



पस्पाइयौं के दौर में यलगार क्या करें

कमज़ोर लोग वार के काबिल नहीं रहे



कांटे पिरो के लाये हैं अहबाब किस लिए

क्या हम गुलों के हार…

Continue

Posted on May 25, 2011 at 12:15am — 7 Comments

GAZAL by AZEEZ BELGAUMI

ग़ज़ल 



अज़ीज़ बेलगामी



हर शब ये फ़िक्र चाँद के हाले कहाँ गए

हर सुबह ये खयाल उजाले कहाँ गए



अब है शराब पर या दवाओं पे इन्हेसार

जो नींद बख्श दें वो निवाले कहाँ गए



वो इल्तेजायें मेरी तहज्जुद की क्या हुईं

थी अर्श तक रसाई, वो नाले कहाँ गए



मंजिल पे आप धूम मचाने लगे जनाब

मुझ को ये फ़िक्र, पांव के छाले कहाँ गए



दस्ते कलम में आज भी अखलाक सोज़ियाँ

किरदारसाज थे जो रिसाले, कहाँ गए



गुलशन के बीच खिलने लगे…
Continue

Posted on May 13, 2011 at 10:11am — 16 Comments

Ek aur Gazal aap ke liye

ग़ज़ल 

अज़ीज़ बेलगामी 

मेरा असासा सुलगता हुवा मकाँ है अभी 

अगरचे आग बुझी है  धुवाँ धुवाँ  है  अभी

यकीं की शम्मा जलाता रहा हूँ सदियौं…

Continue

Posted on December 29, 2010 at 10:53am — 3 Comments

ग़ज़ल : अज़ीज़ बेलगामी

ग़ज़ल



अज़ीज़ बेलगामी



ग़म उठाना अब ज़रूरी हो गया

चैन पाना अब ज़रूरी हो गया



आफियत की ज़िन्दगी जीते रहे

चोट खाना अब ज़रूरी हो गया



गूँज उट्ठे जिस से सारी काएनात

वो तराना अब ज़रूरी हो गया



जारहिय्यत  के दबे एहसास का

सर उठाना अब ज़रूरी हो गया



अब करम पर कोई आमादा नहीं

दिल दुखाना अब ज़रूरी हो गया



साज़िशौं, रुस्वायियौं को दफ'अतन…

Continue

Posted on December 26, 2010 at 2:00pm — 7 Comments

Comment Wall (10 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 12:56am on May 1, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय अजीज बेलगामी जी, आपको ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 9:07am on May 1, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ0 अजीज बेलगामी जी,
सुन्दर संवारें सौ वर्ष,
हर दिन सजाए नवहर्ष।
मंगल कामना सा कर्म,
जीतें जहां का सब धर्म।।
........जन्मदिन के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं स्वीकारें। सादर,

At 10:27am on May 13, 2011, Deepak Sharma Kuluvi said…
अज़ीज़ जी

आपकी  ग़ज़लों का दर्द 
मुझको तो अपना सा लगे
मीठा मीठा तो  नहीं 
फिर भी प्यारा सा लगे

दीपक "कुल्लुवी"
09136211486
At 10:37am on May 1, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 4:13pm on December 17, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय , आप ने एक नया नाम दिया मुझे "नागेश" धन्यवाद |

At 3:16pm on December 17, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 10:06am on December 13, 2010, Admin said…

At 3:01pm on December 3, 2010, Mayank awasthi said…
Sir! Main Apaka Khadim hoon . Aap jo Kahein Hukm Hai mere Liye Aur Meri Khushkismatee hai .aap hamare saath hain ye Sabase Badee Baat hai .
Wo aaye hgar mein Hamare Khuda ki Kudarat Hai
Kabhi Ham unako Kabhi apanr Ghar ko dekhate Hain
At 1:35pm on December 2, 2010, Ratnesh Raman Pathak said…

At 7:37am on December 2, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"और हां.... सादर प्रणाम, आनंदातिरेक, आदरणीय क्षमा करें, औपचारिकता भूल गया था, सादर..  ! "
32 minutes ago
Chetan Prakash commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है, मज़ा गया! ! आदरणीय लगता है, छठे शे'र में, 'चितवन' के बजाए…"
58 minutes ago
Chetan Prakash commented on सालिक गणवीर's blog post मंज़िल की जुस्तजू में तो घर से निकल पड़े..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"अच्छी ग़ज़ल हुई, सलक गणवीर सिंह , आदाब ! बस एक सुझाव दे सकता हूँ, वो ये कि मतले के ऊला में…"
1 hour ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, बहतरीन अशआर पर उम्द: ग़ज़ल हुई है शे'र दर शे'र दाद के…"
6 hours ago
Rachna Bhatia commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार।सर्, लाजवाब ग़ज़ल कही आपने। यह बार बार पढ़ने वाली ग़ज़ल है ।सर्,…"
8 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-है कहाँ
"आदरणीय अमीरुद्दीन'अमीर'जी नमस्कार। अच्छा सुझाव है। आभार। बस..एक बार समर कबीर सर् की…"
8 hours ago
Dharmendra Kumar Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"आप जैसे वरिष्ठ शायर द्वारा उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
9 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post आत्म घाती लोग - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।"
9 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"हार्दिक बधाई आदरणीय समर कबीर साहब जी। लाजवाब ग़ज़ल सफ़र प जाने से पहले ये सोचना है हमेंहर एक गाम प…"
9 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

मौसम को .......

मौसम को .....सुइयाँ अपनी रफ्तार से चलती रहीं समय घड़ी के बाहर खड़ा खड़ा काँपता रहा मौसम समय के काँधे…See More
10 hours ago
Samar kabeer posted a blog post

'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'

ग़ज़ल1212 1122 1212 22 / 112यही समाज की उलझन है क्या किया जाएकि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाएहर…See More
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आजकल इस देश में-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। पुनः उपस्थिति और मसविरे के लिए आभार ।"
10 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service