For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अहबाब ऐतबार के काबिल नहीं रहे
ये कैसे सर हैं ..! दार के काबिल नहीं रहे

जज़्बात इफ्तेखार के काबिल नहीं रहे
अब नवजवान प्यार के काबिल नहीं रहे

हम बेरुखी का बोझ उठाने से रह गए
कंधे अब ऐसे बार के काबिल नहीं रहे

ज़ागो ज़गन तो खैर, तनफ्फुर के थे शिकार
बुलबुल भी लालाज़ार के काबिल नहीं रहे

पस्पाइयौं के दौर में यलगार क्या करें
कमज़ोर लोग वार के काबिल नहीं रहे

कांटे पिरो के लाये हैं अहबाब किस लिए
क्या हम गुलों के हार के काबिल नहीं रहे

रुसवाइयों की ज़र्ब की शिद्दत से हम अज़ीज़
खुद्दारियौं की मार के काबिल नहीं रहे

Views: 687

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Azeez Belgaumi on May 29, 2011 at 8:43am

Hamsheera Mohatarama Devi Sahiba.. Aadab.. Aap ke comments se baDi himmat afzaayee hoti hai. Aap ka bahut bahut shukriya. Isi taraha nawazte raheN.. Ishwar aap ko khush rakhhe.. Azeez Belgaumi

 

Comment by Devi Nangrani on May 29, 2011 at 8:35am
Azeez ji
Pighalta hua dard bhi siyahi ka kaam karta hai is ahsaas ko har ek lafz zahir kar raha hai. 
aaj Rumi ko pdha; Likha tha raat bhar jago, bahut sari ratein jago jab tak savera nahin hota. Andheron ko cheerkar Roushni apne aap ko zahir karti hai. Aapke aandaze bayan bahut hi umda aur margdarshak hai.
 

Comment by Azeez Belgaumi on May 28, 2011 at 11:07am
Bagi ji... Tajraba ke bajaye.. TABSARA paRheN.. regret the mistake : AZEEZ BELGAUMI
Comment by Azeez Belgaumi on May 27, 2011 at 10:52pm

SARA MISRA JI:

Aaap ki mohabbatouN ka shukriya Sara Misra ji

 

NEMICHAND JI:

Mohataram Nemichand ji bahut bahut shukriya….

BAGI SHB:

Dear bagi ji … aap ne mere kalam par baDa achha tajaraba kiya hai.. Badi khushi hasil huwi.. isi taraha nawazte raheN..

Comment by SARA MISRA on May 27, 2011 at 9:22pm
कांटे पिरो के लाये हैं अहबाब किस लिए क्या हम गुलों के हार के काबिल नहीं रहे !!! behatreen nazam  !!!
Comment by nemichandpuniyachandan on May 25, 2011 at 3:09pm
waah..waah..janaab Azeez belgaumi sahib,umda kalaam ke liye Mubarakbad,Paspaiyon ke dour men yalgaar kya kare,kamzor log waar ke kabil naheen rahe|

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 25, 2011 at 10:12am

अज़ीज़ साहिब, आपको सुनना हमेशा ही सुखद रहा है, आपकी ग़ज़ल एक अलग ही कलेवर लिए होती है, प्रस्तुत ग़ज़ल में भी जिस खूबसूरती से हुस्ने मतला का प्रयोग किया गया है वो काबिले गौर एवं नए फनकारों के लिए सिखने योग्य है, बेरुखी का बोझ वाला शे'र बहुत ही खुबसूरत बन पड़ा है साथ में ..............

कांटे पिरो के लाये हैं अहबाब किस लिए
क्या हम गुलों के हार के काबिल नहीं रहे

आय हाय , क्या नजाकत है , वाह साहिब वाह , ये बुलंद अंदाज, बहुत खूब, पूरी ग़ज़ल की जान है यह शे'र,

यदि मकता की बात न किया जाय तो शायद बात अधूरी रह जाएगी, खुबसूरत मकता , ऐसा लगा कि शायर ने पूरी ग़ज़ल को निचोड़ कर उसका सत मकते के अन्दर डाल दिया है |

इस बेहतरीन और उम्द्दा प्रस्तुति पर दाद कुबूल कीजिये जनाब |  

 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
9 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
9 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
9 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
9 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
9 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
10 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश जी स्वयं के प्रचार प्रसार के लिए इस तरह के प्रायोजित कार्यक्रमों का चलन साहित्य और…"
10 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  जी ! //हापुस लँगड़ा नीलम केसर। आम सफेदा चौसा उस पर।।//... कुछ इस तरह किया जा सकता है.…"
10 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service