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राजनीतिक पार्टिया मिल कर कल खूब बंद-बंद का त्योहार मनाया, भारत बंद के नाम पर लफंगो का समूह सरेआम गुंडागर्दी करते देखे गये, आम जनता पूरे दिन बंद की चक्की मे पीसती रही, एक आकलन के मुताबिक देश को 13 हज़ार करोड़ का चूना लगा जो अंततः भारत के आम जनता को ही किसी ना किसी माध्यम से भुगतना होगा, पूरे दिन के एकदिवसीय बंद-बंद टूर्नामेंट खेलने के बाद शाम मे खिलाड़ी मज़े से गला तर करते हुये अपनी अपनी जीत का दावा करते रहे, कौन जीता कौन हारा यह तो पता नही पर भारत की आम जनता पूरी तरह से हार गई इसमे तो कोई शक नही ही है,
खैर जो बीत गया वो बीत गया पर सवाल है क़ि क्या महगाई के विरोध मे किये गये भारत बंद से अब हम भारतीयो को महगाई से निजात मिल जाएगी ? कृपया आप सभी अपनी राय दे,

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eजी नहीं ११० करोड जनता दो मुठ्ठी नेताओं से हार गई
फिरंगीयों के राज में भी इतनी अंधेर गर्दी ना थी
यही तो आश्चर्य है दादी, क्या वास्तव मे हम आज़ाद है, जो लोग सड़को पर दिख रहे थे वो क्या आम जनता थी या प्रायोजित लोग, असली आज़ादी तो तब होगी जब आम जनता स्वत: सड़को पर होगी और अपनी दुकान , प्रतिस्ठान और वाहन स्वेक्षा से बंद रखेगी, न कि दबाव में,
मँहगाई से निजात.....नहीं भाई इसका कोई चांस नजर नहीं आता....और एक बात बोलूँ...ऐसे बंद भी महँगाई वृद्धि के एक कारण होते हैं....अगर अपने देश में ओट की राजनीति बंद हो जाए तो मैं कहूँ की रामराज्य का सपना साकार हो सकता है क्योंकि ओट की राजनीति के बंद होते ही नेता लोग देश के बारे, जनता के बारे में चिंतन करना शुरु कर देंगे और ऐसा होते ही भ्रष्टाचार, निर्धनता, निरक्षरता, क्षेत्रवाद पर अपने आप लगाम लग जाएगी। जय हिंद। जय भारत।।
Prabhakar Bhaiya aap bilkul durust farmaa rahey hai,
जी, इस बंद से हमें महंगाई से तो बिल्कुल निजात नहीं मिलने वाला । बल्कि इसका उल्टा ही असर होने वाला है और ये जो १३ हजार करोड़ का चूना लगा है उसकी भरपाई भी हम और आप ही करने वाले हैं ।
Bilkul sahi baat kah rahi hai didi, main aap ki baat sey poori tarah sahmat hu,
nizat to waise bhi nahi mil rahi hai
to akhir me virodh karna hi antim upaye bach jata hai

aur petrol pr tax agar sarkar hata de to daam kam ho sakte hain
janta ko rahat mil sakti hain

magar sarkar khud wasulne me lagi hai janta jaye bhaand me...
aise thinking se jo mann me aata hai karti ja rahi hai....
ek to waise bhi janta mahngayi ko sambhal nahi paa rahi thi

fir petrol ke daam badha diye...kia kare humlog...kuch kar bhi nahi sakte....bs muh faad dekhte rahenge...ye rajniti

band hone se nuksaan to hua hai mai manta hun

magar is belagam sarkar ko rokne ka koi or upaye ho to bataye........

meri samajh se band wazib hai nuksan apni jagah hai, aur awaz buland karna apni jagah.....

petrol pr tax hatana chahiye sarkar ko.....
जी, इस बंद से हमें महंगाई से तो बिल्कुल निजात नहीं मिलने वाला । बल्कि इसका उल्टा ही असर होने वाला है और ये जो १३ हजार करोड़ का चूना लगा है उसकी भरपाई भी हम और आप ही करने वाले हैं ।
chuna to warso se janta bharti aarahi hai.....

aage bhi chup chap bharti rahegi....kyunki hum sb bharatiya hai!!!!
ganesh jee ab khali kahne sunne se nahi hoga
kuch karna hoga.....

bardast nahi hota ye nautanki.....bahut hogaya.....kranti laani hogi indian politics me bhude corrupt ko nikal baher hame ghusna hoga
agar desh ko bachan hai to kuch to karna hi hoga...
मैं आप लोगो की बात से सहमत हूँ की बंद से नुकसान होता हैं और हमें ही कही न कही से भरपाई करना होगा लेकिन इस बेसरम सरकार को ये बात कैसे समझाया जाय ओ हिज्रो की फौज लेकर राज करने वाले डाक्टर मनमोहन सिंग आज से एक साल पहले जब डीजल १५०% /बेरल था और आज ८० के आस पास हैं तो फिर क्या जरुरत थी रेट बढ़ने का और साथ में आप लोगो को बता दू सब कोई सरकारी नोकरी नहीं करता हैं की सरकार महगाई भाता दे रही हैं और आप राज कर रहे हैं , आप उस गरीब के पास खड़ा होकर देखे समझ में आ जायेगा बिरोधी पार्टी का बंद जाएज हैं , अगर मेरी बात गलत लगी हो तो मुझे माफ़ करना दोस्तों ,
गुरु जी इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है की पेट्रोलियम पदार्थो का मूल्य बढ़ने से आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, पर सवाल यह उठता है कि सही बात भी कहने का तरीका क्या सही था ? इस बवाल को अंजाम देने मे कितने लोग आम जनता मे से थे ? कितने लोग apni pratisthano को sweksha से band kiyey थे ,

आम जनता के द्वारा चुनी गई सरकार और उनके मंत्रिमंडल को हिजड़ा कह कर संबोधित करना कितना उचित है? यह मंच ऐसे शब्दों के प्रयोग कि निंदा करता है, वैसे यह आपकी अपनी राय है, हो सके तो इसे एडिट कर ले, धन्यवाद,

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