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नयना(आरती)कानिटकर's Discussions (929)

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"" दृष्टिकोण " वो साप्तहिक हाट बाजार में ले जाने वाले सारे लकड़ी के खिलौने इकठ्ठा करते…"

नयना(आरती)कानिटकर replied Dec 30, 2023 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-105 (विषय: शुभचिंतक)

5 Dec 31, 2023
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

"← मेरे बसंत चाय का घूँट तो रोज भरती हूँ  धीरे धीरे  सुबह शाम घर के बगीचे में या छत…"

नयना(आरती)कानिटकर replied Feb 11, 2023 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-148

11 Feb 12, 2023
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"कर्ज की आपदा एक गंभीर मुद्दा है। रचना आरंभ अच्छी हुई पर अंत कहीं कमजोर पड़ गया। एक त…"

नयना(आरती)कानिटकर replied Jan 31, 2023 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94

80 Jan 31, 2023
Reply by अजय गुप्ता 'अजेय

"प्रतिकात्मक शैली की बेहतरीन लघुकथा हुई है मनन जी भाषा,प्रवाह सभी कुछ उत्तम"

नयना(आरती)कानिटकर replied Jan 31, 2023 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94

80 Jan 31, 2023
Reply by अजय गुप्ता 'अजेय

"घटना को अभी लघुकथा में परिवर्तित होना बाकी है। शुभकामनाएं "

नयना(आरती)कानिटकर replied Jan 31, 2023 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94

80 Jan 31, 2023
Reply by अजय गुप्ता 'अजेय

"समसामयिक रचना प्रतिभा दी। बहुत अच्छा मुद्दा उठाया आपदा पर आपने। क्षैत्रिय शब्दों के…"

नयना(आरती)कानिटकर replied Jan 31, 2023 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94

80 Jan 31, 2023
Reply by अजय गुप्ता 'अजेय

"जी पहिला ड्राफ्ट. अचानक लिखी रचना है. अभी इस पर काम अवश्य करूॅंगी । वर्तनी पर भी कभी…"

नयना(आरती)कानिटकर replied Jan 31, 2023 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94

80 Jan 31, 2023
Reply by अजय गुप्ता 'अजेय

"बहुत उम्दा लघुकथा बबिता जी"

नयना(आरती)कानिटकर replied Jan 31, 2023 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94

80 Jan 31, 2023
Reply by अजय गुप्ता 'अजेय

"प्रतिकों के माध्यम से अच्छी लघुकथा कमी अजय जी"

नयना(आरती)कानिटकर replied Jan 31, 2023 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94

80 Jan 31, 2023
Reply by अजय गुप्ता 'अजेय

"धात्री मैं बड़ी खुश थी .एक असुविधाओं से भरे छोटे से गांव से मई चकाचौंध  भरी नयी दुनिय…"

नयना(आरती)कानिटकर replied Jan 31, 2023 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94

80 Jan 31, 2023
Reply by अजय गुप्ता 'अजेय

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२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
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