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"ओपन बुक्स ऑनलाइन के 12 वें वर्ष में प्रवेश पर संस्थापक महोदय, प्रधान संपादक महोदय सह…"

VIRENDER VEER MEHTA replied Apr 6, 2022 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3526 Jan 25
Reply by Samar kabeer

"बहुत ही दुःखद सूचना है। ईश्वर के कई निर्णय ऐसे होते हैं, जिनका विश्वास करने के लिए म…"

VIRENDER VEER MEHTA replied May 23, 2021 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3526 Jan 25
Reply by Samar kabeer

"बहुत ही दु:खद. . .  ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने चरणो में स्थान दे, और  परिवार को यह…"

VIRENDER VEER MEHTA replied Jan 16, 2021 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3526 Jan 25
Reply by Samar kabeer

"आदरणीय भाई योगराज सर के छोटे भाई रमेश भाई जी की आकस्मिक मृत्यु से बहुत दुःख हुआ है,…"

VIRENDER VEER MEHTA replied Apr 26, 2020 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3526 Jan 25
Reply by Samar kabeer

"ओपन बुक्स ऑनलाइन समूह के सफलता पूर्वक बीते बर्षों के लिए समूह मंडल को हार्दिक साधुवा…"

VIRENDER VEER MEHTA replied Apr 12, 2020 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3526 Jan 25
Reply by Samar kabeer

"आदरणीय समर कबीर जी, आपके भाई साहब के स्वास्थ्य के बारे में पढ़कर मन बहुत व्यथित है।…"

VIRENDER VEER MEHTA replied Apr 12, 2020 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3526 Jan 25
Reply by Samar kabeer

"सुंदर लघुकथा भाई विनय कुमार जी। वर्तमान की स्थितियों में सही में एक रोशनी दिखाने के…"

VIRENDER VEER MEHTA replied Feb 29, 2020 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)

149 Feb 29, 2020
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

"विषय पर प्रस्तुति तो अच्छी हुयी है भाई तेज वीर सिंह जी, लेकिन जैसा कि आदरणीय योगराज…"

VIRENDER VEER MEHTA replied Feb 28, 2020 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)

149 Feb 29, 2020
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

"बेहतरीन लघुकथा आदरणीय बागी सर।  सफर विषय को छू कर निकलती यह रचना विकलांग विषय और विक…"

VIRENDER VEER MEHTA replied Feb 28, 2020 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)

149 Feb 29, 2020
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

"प्रदत्त विषय पर अच्छी प्रस्तुति हुयी उस्मानी भाई। अंत में कहा गया वाक्य //"केवल नंगो…"

VIRENDER VEER MEHTA replied Feb 28, 2020 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)

149 Feb 29, 2020
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

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दोहा पंचक. . . . .

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"जी सृजन के भावों को मान देने और त्रुटि इंगित करने का दिल से आभार । सहमत एवं संशोधित"
2 hours ago
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"'सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो इंसाफ़ को फ़िर लोग सदा क्यों नहीं देते' ऊला यूँ…"
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"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर्, "बिना डर" डीलीट होने से रह गया।क्षमा चाहती…"
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"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छे दोहे हुए है। हार्दिक बधाई। लेकिन यह दोहा पंक्ति में मात्राएं…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"आ. भाई बलराम जी, सादर अभिवादन। शंका समाधान के लिए आभार।  यदि उचित लगे तो इस पर विचार कर सकते…"
23 hours ago
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"//सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो इंसाफ़ को फ़िर लोग बिना डर के सदा नहीं देते // सानी…"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी"
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Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, सादर नमस्कार। आपकी शिरकत ग़ज़ल में हुई, प्रसन्नता हुई। आपकी आपत्ति सही है,…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"आ. भाई बलराम जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है। हार्दिक बधाई।  क्या "शाइर" शब्द…"
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ग़ज़ल-रफ़ूगर

121 22 121 22 121 22 सिलाई मन की उधड़ रही साँवरे रफ़ूगर सुराख़ दिल के तमाम सिल दो अरे रफ़ूगर उदास रू…See More
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