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  1. (मगण,सगण व गुरु एवं दो-दो चरणों में सम तुकांतता)
    -----------------------------------------------------------------
    1-
    नेताजी   कल   आए, बैठे   थे   बतियाए।
    बोले वोट दिलाओ, आओ हाथ मिलाओ।।
    2-
    नेताजी  जब आए, नारे  खूब  लगाए।
    घण्टों वो रिरियाए, पैसे भी दिखलाए।।
    3-
    मेरी  नाक  बचाओ, कोई  स्वाँग  रचाओ।
    जो चाहो तुम बोलो, मेरी किस्मत खोलो।।
    4-
    जो नेतागण आते, दूजे को गरियाते।
    घोटाले  करवाते, बातों में भरमाते।।
    5-
    कुर्सी खूब निगोड़ी, मर्यादा सब छोड़ी।
    वादे आज चुनावी, बोलें बात प्रभावी।।
    6-
    कुर्सी की अभिलाषा,गाली सी अब भाषा।
    पानी  है  बस  सत्ता, कैसे  भी  अलबत्ता।।
    (मौलिक व अप्रकाशित)
    **हरिओम श्रीवास्तव**
    --08.05.2019--

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Comment by Hariom Shrivastava on May 9, 2019 at 1:40pm

हार्दिक आभार आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी।

Comment by Hariom Shrivastava on May 9, 2019 at 1:39pm

हार्दिक आभार आदरणीय बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी। आपकी प्रेरक प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ।

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