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है कयामत या है बिजली सी जवानी आपकी
खूबसूरत सी मगर है जिंदगानी आपकी

तीर आँखों से चलाना या पिलाना होंठ से
भूल सकता हु नहीं मैं हर निशानी आपकी

आप मोहसिन है हमारे आपका एहसान है
हमसफ़र हमको बनाया मेहेरबानी आपकी

रूठ कर नज़रें चुराना मुस्कुराना फिर मगर
याद है सब कुछ मुझे बातें पुरानी आपकी

तुमसे वाबस्ता है मेरी जिंदगानी का हर वरक
ज़िन्दगी मेरी है कहानी आपकी

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Comment by Babita Gupta on May 19, 2010 at 12:17pm
aap ki rachnayey sabhi achhi hoti hai, par yey thodaa sa 19 laga mujhey, woisey mai koi jankar nahi hu,jo dilo dimag ney mahsus kiya wo mainey kaha,thanks
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on May 16, 2010 at 4:53pm
तीर आँखों से चलाना या पिलाना होंठ से
भूल सकता हु नहीं मैं हर निशानी आपकी
bahut khoob aleem jee....ek baar fir se aapki acchi rachna padhne ko mili iske liye aapka bahut bahut dhanyabaad

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 16, 2010 at 3:09pm
तुमसे वाबस्ता है मेरी जिंदगानी का हर वरक
ज़िन्दगी मेरी है कहानी आपकी

अलीम जी, जज्बातों को घेरा बनाये हुवे ये आपकी ग़ज़ल बहुत बढ़िया है, आपने बहुत ही बढ़िया शेरो से सजाया है इस ग़ज़ल को, धन्यवाद,
Comment by Kanchan Pandey on May 16, 2010 at 2:17pm
रूठ कर नज़रें चुराना मुस्कुराना फिर मगर
याद है सब कुछ मुझे बातें पुरानी आपकी

Bahut badhiya Aleem jee, aek baar phir aapney shandar Ghazal padha hai, Thanks

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