For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गंगा जमुना  भारती ,सर्व  गुणों की खान
मैला करते नीर को  ,यह पापी इंसान .

सिमट रही गंगा नदी ,अस्तित्व का सवाल
कूड़े करकट से हुआ ,जल जीवन बेहाल .

गंगा को पावन करे  , प्रथम यही अभियान
जीवन जल निर्मल बहे ,सदा करे  सम्मान .
--- शशि पुरवार

Views: 687

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by shashi purwar on April 4, 2013 at 12:58pm

saurabh ji tahe dil se abhaar aapka , aapka yah margdarshan , aage badhne me sahayak hoga , dhyan rakhoongi . abhaar


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 1, 2013 at 3:13pm

आदरणीया शशि पुरवारजी, आपकी प्रथम प्रविष्टि ही आपकी रचनाओं के प्रति उत्सुकता जगा गयी है.  कथ्य सुन्दर है, मात्रिकता भी यथोचित है,  किन्तु शब्द-संयोजन का सही निर्वहन होना बाकी है. यह सब सहज और सरल है. बस सतत रहें.

इस सीखने-सिखाने के अभिनव मंच पर आपका सादर स्वागत है, आदरणीया.

एक बात :
मैला करते नीर को  ,यह पापी इंसान ...  .   पापी इन्सान के साथ यह  न कर ये कर दें, भाषागत दोष सध जायेगा.
सिमट रही गंगा नदी ,अस्तित्व का सवाल ..     है अस्तित्व सवाल
गंगा को पावन करे  में  पावन करें करना उचित होगा.   इसी तरह  सदा करे की जगह सदा करें करना उचित होगा.

Comment by shashi purwar on April 1, 2013 at 2:40pm

abhaar prachi ji protsaahit karti hui pratikriya hetu .


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 22, 2013 at 3:38pm

प्रिय शशि जी सुन्दर व सार्थक दोहा प्रयास पर हार्दिक बधाई स्वीकारिये 

लिखते लिखते छंद रचनाएँ स्वतः ही सधने लगती हैं, आपने शिल्प का निर्वहन बिलकुल सही प्रकार से किया है, बस कथ्य को थोडा और कसना है और गेयता का ध्यान रखना है..

इस सुन्दर प्रयास के लिए ह्रदय तल से बधाई.

शुभकामनाएँ 

Comment by राजेश 'मृदु' on March 21, 2013 at 5:23pm

हम आपकी रचना का इंतजार करेंगें, सादर

Comment by shashi purwar on March 21, 2013 at 5:04pm

rajesh ji dhanyavad , aapne sahi kaha meri kalam is vidha me sahajta ka anubhav nahi karti hai , par naye prayog karne chahiye isiliye ek prayas tha , purane mitro ko dekh thodi sahajta jaroor hui , aapne kaha hai to ek baar apni kalam ki rachna post karoongi yadi yahan ke niyam honge to .... sadar abhaar

Comment by राजेश 'मृदु' on March 21, 2013 at 4:39pm

इस मंच पर पहली बार आपकी रचना से मुखातिब हूं, दोहे अच्‍छे लगे किंतु मुझे लगता है इसमें आप उतनी सहज नहीं हैं जितनी अन्‍य विधा में होती हैं। चूंकि मैं आपको अभिव्‍यक्ति में पढ़ चुका हूं इसलिए आप अपने रंग में एक रचना दें तो आनंद आ जाए, सादर

Comment by shashi purwar on March 21, 2013 at 11:18am

aap sabhi ka tahe dil se shukriya , ram ji , mukherji ji , kewal ji , brajesh ji ,

Comment by ram shiromani pathak on March 21, 2013 at 11:10am

इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकारें आदरणीय शशि जी!

Comment by coontee mukerji on March 21, 2013 at 1:41am

shashi ji , sundar kal kal bahti nadee to ab sapnon mein hi rah gae hai.iss sandesh ke liye bahut subkamnaen.sab ke dil tak apki baat pahooche

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
9 hours ago
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
14 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212   22 वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है कितने दुःख दर्द से भरा दिल…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२***पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१। *…See More
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service