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पेंसिल या पेन

किस तरह का स्याही

आप फैल रहे हैं?

आग पर कीबोर्ड

सपने और इच्छाएं

कुछ हास्य

कुछ आँसू

गंभीरता  एक खुराक

जीतने वाले शब्द

शब्दों को विभाजित करना

शब्द जो हमें एक साथ लाते हैं

शब्द जो जीवन बोलते हैं

कोई बात नहीं कविता या टुकड़ा

कविता है

और हमेशा जीवित रहेगी

मौलिक व अप्रकाशित.

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Comment

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Comment by नाथ सोनांचली on March 26, 2018 at 9:45am

आद0 नरेंद्र जी सादर अभिवादन। बढिया रचना। इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 25, 2018 at 12:52pm

हार्दिक बधाई.

Comment by Mohammed Arif on March 22, 2018 at 4:33pm

आदरणीय नरेंद्र सिंह जी आदाब,

                           कविता की हिमायत करती बहुत ही सशक्त कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Samar kabeer on March 22, 2018 at 3:17pm

जनाब नरेंद्र सिंह चौहान साहिब आदाब,अच्छी कविता है, बधाई स्वीकार करें ।

'किस तरह का स्याही'---"किस तरह की स्याही"

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