For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

'दिल में हमारे दर्द-ए- महब्बत रखा गया'

मफ़ऊल फ़ाइलात मफ़ाईल फ़ाइलुन

(हुस्न-ए-मतला और उसके बाद का शे'र क़ित'अ बन्द हैं)

जब इम्तिहान-ए-शौक़-ए- शहादत रखा गया

इनआम उसका दोस्तो जन्नत रखा गया

पहले तो इसमें नूर-ए-सदाक़त रखा गया

फिर इसके बाद जज़्ब-ए- उल्फ़त रखा गया

तकलीफ़ दूसरों की समझ पाएँ इसलिये

दिल में हमारे दर्द-ए-महब्बत रखा गया

कोई भी शय फ़ुज़ूल नहीं इस जहान में

हर एक शय को हस्ब-ए-ज़रूरत रखा गया

लेता नहीं है रोज़ वो आमाल का हिसाब

ये फैसला तो रोज़-ए-क़यामत रखा गया

अह्ल-ए-वफ़ा तो एक भी आया नहीं नज़र

बस्ती में जब भी जश्न-ए-महब्बत रखा गया

हम रहरवान-ए-शौक़ की राहों में ऐ "समर"

दरया रखा गया कभी पर्बत रखा गया

"समर कबीर"

मौलिक/अप्रकाशित

Views: 736

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on March 7, 2018 at 10:53am

जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।

Comment by Samar kabeer on March 7, 2018 at 10:51am

जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।

Comment by Samar kabeer on March 7, 2018 at 10:50am

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।

Comment by Samar kabeer on March 7, 2018 at 10:48am

जनाब हर्ष महाजन जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।

Comment by Samar kabeer on March 7, 2018 at 10:47am

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।

Comment by Samar kabeer on March 7, 2018 at 10:44am

जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।

Comment by Samar kabeer on March 7, 2018 at 10:43am

जनाब 'दीप' साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।मैं

Comment by Samar kabeer on March 7, 2018 at 10:41am

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।

Comment by Samar kabeer on March 7, 2018 at 10:40am

जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ,टंकण त्रुटि की तरफ़ ध्यान दिलाने के लिए शुक्रिया ।

Comment by Samar kabeer on March 7, 2018 at 10:38am

जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167

परम आत्मीय स्वजन,ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 167 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है ।इस बार का…See More
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-109 (सियासत)
"यूॅं छू ले आसमाॅं (लघुकथा): "तुम हर रोज़ रिश्तेदार और रिश्ते-नातों का रोना रोते हो? कितनी बार…"
Apr 30
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-109 (सियासत)
"स्वागतम"
Apr 29
Vikram Motegi is now a member of Open Books Online
Apr 28
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .पुष्प - अलि

दोहा पंचक. . . . पुष्प -अलिगंध चुराने आ गए, कलियों के चितचोर । कली -कली से प्रेम की, अलिकुल बाँधे…See More
Apr 28
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई दयाराम जी, सादर आभार।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई संजय जी हार्दिक आभार।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. रिचा जी, हार्दिक धन्यवाद"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई दिनेश जी, सादर आभार।"
Apr 27

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service