For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पक्का अबीर उसने तन-मन पर डाल दिया..... होली की असीम शुभकामनाओं के साथ एक नवगीत // डॉ० प्राची

कुछ मचल-मचल

कुछ सम्हल-सम्हल

सब रंग लुटाने आया फागुन का छलिया...

 

घोल हवा में मस्ती की लहराती धुन,

गीत मिलन के मीठे से गाता गुनगुन,

मुस्काता आँखों में भर कर शैतानी,

मैं हारी ! चलने दी उसकी मनमानी,

 

गुपचुप-गुपचुप 

लुकछुप-लकछुप 

फिर रास रचाने आया नटखट सा रसिया...

 

सोये सपनों की खिड़की पर दे दस्तक,

नेह ठिठोली के माँगे वो सारे हक़,

मुट्ठी में भींचे रंगों को छितराकर,

ठिठकी सी मुस्कानें इतरा दीं हँसकर,

 

लहकी-लहकी 

बहकी-बहकी 

मनरंगी अरमानों की लाया चूनरिया..

 

लाल-गुलाबी रिश्तों का ताना-बाना,

जाने कब बुन बैठा शातिर अनजाना,

लाख छुटाऊँ मगर रंग ना छूटेंगे,

इस बंधन के धागे अब ना टूटेंगे

 

दीवाना कर

मस्ताना कर

पक्का अबीर उसने तन-मन पर डाल दिया...

मौलिक और अप्रकाशित 

Views: 356

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on March 14, 2017 at 6:13pm
मोहतरमा डॉ.प्राची सिंह साहिबा आदाब,वधिया नवगीत लिखा आपने बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 14, 2017 at 11:15am
आदरणीया होली के शुभ अवसर पर इस बेहतरीन नवगीत की सौगात से चार चाँद लग गए आपको भी ढेर सारी शुभकामनाएं सादर
Comment by Mohammed Arif on March 13, 2017 at 1:56pm
आदरणीया प्राची सिंह जी आदाब, होली के रंगों से रंगीन रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई और होली की शुभकामनाएँ ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वफ़ा के देवता को बेवफ़ा हम कैसे होने दें(११३ )
"भाई Rupam kumar -'मीत'  जी , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिली शुक्रिया | "
1 hour ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास
" आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफजाई के लिए हार्दिक आभार"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (क्या नसीब है)
"जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी, ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये बहुत बहुत…"
4 hours ago
Chetan Prakash left a comment for Rupam kumar -'मीत'
"मित्र, आपका स्वागत है !"
4 hours ago
Chetan Prakash and Rupam kumar -'मीत' are now friends
4 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मौत से कह दो न रोके -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। चन्द टंकण…"
4 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वफ़ा के देवता को बेवफ़ा हम कैसे होने दें(११३ )
"साहब, गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब, क़बूल कीजिए, हर शेर के लिए दाद और मुबारक बाद…"
5 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( आएगी कल वफ़ात भी तू सब्र कर अभी...)
"सर सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन क़ुबूल  किजीए। हम वो नहीं हुज़ूर जो डर जाए चोट सेहमने तो…"
5 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (क्या नसीब है)
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब, क्या ही  कहने वाह! बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है।"
5 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (क्या नसीब है)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये…"
6 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (क्या नसीब है)
"मुहतरम जनाब रवि भसीन 'शाहिद' साहिब, आदाब। ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी, दाद, और हौसला अफ़ज़ाई के…"
6 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service