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22-22-22-22-22-22-22-2


सच को लिख कर तुम दुनिया में होने का इज़हार करो
झूठी बातेँ सारी छोड़ो दिल को ना लाचार करो

गर जीवन में मुश्किल आए हिम्मत को मत हारो तुम
शिकवे छोड़ो मन में ठानो फिर ख़ुद को औज़ार करो

कितने अच्छे वो दिन लगते जब हम छोटे बच्चे थे
मम्मी पापा कहते फिरते मत दिन को बेकार करो

नफरत जग में जिसने बांटी देखो उसका हाल बुरा
तोड़ो सारी तुम दीवारें मिल के सबसे प्यार करो

मिट्टी पानी आग हवा केवल जरिया हैं जीवन का
सब कुछ आखिर उसका होगा मत ख़ुद को अख़बार करो

झंडा ऊँचा भारत का हो इतनी सबकी इच्छा है
आओ मिल कर सारे सोचो औ सपना साकार करो.....

.

मुनीश 'तन्हा' ....नादौन
9882892447

मौलिक  व अप्रकाशित

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Comment by munish tanha on May 7, 2016 at 9:45pm
Dhanyavad sahib
Comment by Samar kabeer on May 7, 2016 at 6:19pm
जनाब मुनीश 'तन्हा'साहिब आदाब,बहुत प्यारी ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ।
दूसरे शैर के ऊला मिसरे में तरमीम करलें,तक़ाबुल-ए-रदीफ़ का दोष आगया है:-
"गर जीवन में मुश्किल आये हिम्मत को मत हारो तुम"

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