For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गजल ,वो मुझे एकटक देखती रह गई

हाथ पर उसके ठोडी टिकी रह गई
वो मुझे एकटक देखती रह गई

वो हवा हो गई एक पल में कंही
मुस्कुराहट यहाँ गूँजती रह गई

मंजिलों की तरफ दौड़ते -दौड़ते,
जिंदगी कट गई बेबसी रह गई

आपकी याद जिंदा जलाई मगर,
आँधियाँ फिर चलीं,अधजली रह गई

सच का सूरज उजाला बहुत भर गया,
रात आईं मगर रोशनी रह गई

सूबे सिंह सुजान
मौलिक व प्रकाशित

Views: 409

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सूबे सिंह सुजान on March 20, 2015 at 5:44pm
gumnaam,ji धन्यवाद
Comment by Hari Prakash Dubey on March 18, 2015 at 9:07pm

आदरणीय सूबे सिंह सूजान जी, इस सुन्दर रचना पर बधाई प्रेषित ! सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 18, 2015 at 8:25pm

आदरणीय सूबे सिंह जी सुन्दर ग़ज़ल हेतु हार्दिक बधाई 

आदरणीय गिरिराज सर की सलाह अच्छी है उससे मैं भी सहमत हूँ.

एक निवेदन है ग़ज़ल की बह्र का वज्न 212x4 अवश्य लिख दे 

Comment by somesh kumar on March 18, 2015 at 7:00pm

मंजिलों की तरफ दौड़ते -दौड़ते,
जिंदगी कट गई बेबसी रह गई

सुंदर शे'रों के जरिए कुछ सम्वेदनाओं और कुछ जीवन-सत्यों को बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया आप ने ,बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 18, 2015 at 5:48pm

आदरनीय सूबे सिंह भाई , बहुर सुन्दर गज़ल हुई है , हार्दिक बधाइयाँ आपको ॥

वो हवा हो गई एक पल में कंही
मुस्कुराहट यहाँ गूँजती रह गई      ---- इस शे र में ,मुस्कुराहट की जगह  खिलखिलाहट  क्या अच्छा नहीं रहेगा ? क्योंकि आगे बात गूंजने की हो रही है ॥

Comment by gumnaam pithoragarhi on March 18, 2015 at 5:41pm

सुंदर रचना के लिए बधाई ...........................

Comment by सूबे सिंह सुजान on March 18, 2015 at 1:22pm
Shyam mathpal,जी आपका स्वागत है,बहुत बहुत धन्यवाद
Comment by सूबे सिंह सुजान on March 18, 2015 at 1:21pm
आदरणीय विजयी शंकर जी,आपकी मेहरबानी है,बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by सूबे सिंह सुजान on March 18, 2015 at 1:19pm
Shyam narayan sharma,जी आपकी जरर्रानवाजी है,धन्यवाद
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 18, 2015 at 12:23pm


 वो हवा हो गई एक पल में कंही
मुस्कुराहट यहाँ गूँजती रह गई

मंजिलों की तरफ दौड़ते -दौड़ते,
जिंदगी कट गई बेबसी रह गई------------------सुन्दर रचना  आ० सुजान जी .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी,  //फसाना पूर्णरूप से काल्पनिक हो सकता है लेकिन कहानी कई बार सत्य भी…"
20 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी ग़ज़ल की विस्तृत समीक्षा के लिए हार्दिक आभार आपका...फसाना और कहानी में थोड़ा…"
yesterday
babitagupta posted a blog post

अनकंडीशनल दोस्ती

दोस्ती यानि जिंदगी....जिंदगी की नींव, खुशी, ख्वाब हैं और  ख्वाब की ताबीर भी...!दोस्ती वो ताकत होती…See More
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"पुनश्च: //पढ़ो गौर से जल्दबाजी न कीजे... कीजै के साथ 'पढ़ो' नहीं 'पढ़ें'…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ख़ूबसूरत ख़याल के साथ ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार…"
Saturday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-अलग है

122     122     122     122फ़साना जुदा था कहानी अलग  हैसुनो ख़्वाब से ज़िंदगानी अलग  हैये गरमी की…See More
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani left a comment for Dr.priya sufi
"आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीया जी।.आशा है कि अब आप मुख्य पृष्ठ पर दर्शाये गये समूहों की सूची व लिंक…"
Friday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी posted blog posts
Friday
Dr.priya sufi is now a member of Open Books Online
Thursday
Anita Maurya commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post एक दिन आ‍ँसू पीने पर भी टैक्स लगेगा (ग़ज़ल)
"क्या बात , बेहद शानदार..."
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आँसू
"बहुत बहुत आभार आदरणीय धामी जी...सादर"
Thursday
AMAN SINHA posted a blog post

बस मेरा अधिकार है

ना राधा सी उदासी हूँ मैं, ना मीरा सी  प्यासी हूँ मैं रुक्मणी हूँ अपने श्याम की, मैं हीं उसकी…See More
Aug 1

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service