For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक नामी कॉलेज मेँ कोई मनचला एक लड़की के साथ बदतमीज़ी करने लगा और वो डरी सहमी होने के बाद भी विरोध करने का प्रयास कर रही थी, लेकिन नाकाम रही और वहाँ खड़े लोग मूकदर्शक बने तमाशे का आनन्द लेते रहे।
"ऐसे पचड़ोँ मेँ कोई भला क्यूँ पड़े?"
पर एक लड़के को जाने क्या पड़ी थी जो उस लड़के को पकड़कर एक थप्पड़ रसीद कर दिया। उस मनचले को ऐसा अप्रत्याशित व्यवहार असहनीय था। उसने झट से पलटवार किया। मामले को यूँ बढ़ता देख लोगोँ ने बीच-बचाव किया।

"आखिर इस दृश्य मेँ वह आनन्द कहाँ था?"
खैर, बला टली।

अगले दिन वो मनचला कुछ लड़कोँ के साथ आया और उस लड़के के साथ मारपीट करने लगा। थोड़ी देर मेँ उसके भी साथी आ गए। चूँकि दोनोँ लड़के अलग अलग धर्मोँ के थे तो जल्दी ही छोटी सी घटना ने हिन्दू-मुस्लिम झगड़े का रूप ले लिया। कॉलेज मेँ तोड़-फोड़ हुई। कुछ निर्दोष लोग ज़ख्मी हुए। अख़बारोँ मेँ सुर्खियाँ छपी। नेताओँ ने मामले कि निन्दा करते हुए जमकर भाषण दिए।

"पर कौन जाने वो लड़की हिन्दू थी या मुस्लिम?"

"पूजा"
"मौलिक एवं अप्रकाशित"

Views: 620

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by pooja yadav on December 11, 2014 at 12:14pm
जैसे ही समय मिलेगा मैँ इस रचना मेँ सुधार का प्रयास करूँगी आदरणीय योगराज जी।

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 10, 2014 at 10:51am

लघुकथा में निहित भाव सुन्दर हैं, लेकिन प्रस्तुति अभी काफी कमज़ोर है  प्रिय पूजा यादव जी।

//"आखिर इस दृश्य मेँ वह आनन्द कहाँ था?"
खैर, बला टली। //

बात कहने की यह शैली लघुकथा को ढीला बना रही है। सतत प्रयास और अभ्यास से लेखनी में निखार आएगा।

Comment by pooja yadav on December 6, 2014 at 8:14pm

sabhi aadarneey paathakjano ka saadar aabhaar..meri rachna par aap sabhi ki upasthiti ke liye dil se aabhaari hu

Comment by pooja yadav on December 6, 2014 at 8:12pm

ji aadarneey gopal shreevastv ji.............aapke maargdarshan ke liye hraday se aabhaari hu...........saadar aabhaar


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 6, 2014 at 3:58pm

आ. पूजा जी वर्तमान की ज्वलंत समस्या सुन्दर रचना हुई है , बधाइयाँ ।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 3, 2014 at 7:25pm

पूजा जी

इन्सानियत  धर्म नहीं है I इंसानियत धर्म का अंग है i इसलिए वह धर्म से ऊपर नहीं है  i आपकी पंच लाइन हिन्दू मुसलिम की बात करती है इंसानियत की नहीं  I शीर्षक कथा का केन्द्रीय भाव होना चाहिए i इससे अधिक संक्षेप में इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता  i  आप स्वयं समझदार हैं I

Comment by pooja yadav on December 3, 2014 at 6:05pm
Aap sabhi aadarneey lekhakganno ke vicharon ka samaan karti hu. . . Aur meri rachna par aap sab ki maujoodgi ke liye dil se aabhaari hu. . .
Sachcha dharm insaaniyat ka maarg dikhaata hai. . Aisa hum padhte aaye h. . Aur yah bhi jaante h ki apne apne dharm ka anuyayi vyakti apne dharm ko hi shresth maanta aur bataata h. . Par jab baat kartvya paalan ki aati h to dharm to door insaaniyat tak bhool jaate h. . Dharm insaaniyat se upper nahi. . . Kya wo manchla, wo tamaasha dekhte log, bhed chaal ki tarah hindu musalmaan ke naam par jama hote log kya insaan kahlaane ke bhi yogya the. . ?
Mere vichaar se insaaniyat se bada dharm nahi. . Yahi se sheershak rakha h. .
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 3, 2014 at 12:37pm

सोमेश जी ने ठीक कहा शीर्षक कथा  के साथ न्याय नहीं करता  i कथा की अन्तिम पंक्ति  ही पंच लाइन है I

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 2, 2014 at 8:05pm
अच्छी प्रस्तुति . मूल प्रश्न या समस्या को ज़िंदा रखने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि उसे ही उलझा दो। हम भी रोज यही करते हैं।
इस कहानी के लिए बधाई।
Comment by somesh kumar on December 2, 2014 at 7:18pm

कहानी का अंत शीर्षक से जुड़ता नहीं लग रहा |शायद शीर्षक बदलना चाहिए |इन्सान का धर्म ,सच्चा धर्म या सिर्फ धर्म ज्यादा मेल खाते हैं ,पर क्युकी कहानी इसी शीर्षक के साथ स्वीकार की गया है तो हो सकता है मेरा नजरिया अलग हो,बरहाल सुंदर प्रयास के लिए बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . .
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
3 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post भादों की बारिश
"आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी लघुकविता का मामला समझ में नहीं आ रहा. आपकी पिछ्ली रचना पर भी मैंने…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरिराज भाईजी, आपकी प्रस्तुति का यह लिहाज इसलिए पसंद नहीं आया कि यह रचना आपकी प्रिया विधा…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . .
"आदरणीय सुशील सरनाजी, आपकी कुण्डलिया छंद की विषयवस्तु रोचक ही नहीं, व्यापक भी है. यह आयुबोध अक्सर…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Aazi Tamaam's blog post तरही ग़ज़ल: इस 'अदालत में ये क़ातिल सच ही फ़रमावेंगे क्या
"आदरणीय आजी तमाम भाई, आपकी प्रस्तुति पर आ कर पुरानी हिंदी से आवेंगे-जावेंगे वाले क्रिया-विषेषण से…"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ
"आदरणीय सुशील सरनाजी, आपके अनुमोदन के लिए हार्दिक आभार"
5 hours ago
Sushil Sarna commented on Saurabh Pandey's blog post कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ
"वाह आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी एक अलग विषय पर बेहतरीन सार्थक ग़ज़ल का सृजन हुआ है । हार्दिक बधाई…"
19 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ

२१२२ १२१२ २२/११२तमतमा कर बकी हुई गालीकापुरुष है, जता रही गाली मार कर माँ-बहन व रिश्तों को कोई देता…See More
23 hours ago
Chetan Prakash commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post भादों की बारिश
"यह लघु कविता नहींहै। हाँ, क्षणिका हो सकती थी, जो नहीं हो पाई !"
Tuesday
सुरेश कुमार 'कल्याण' posted a blog post

भादों की बारिश

भादों की बारिश(लघु कविता)***************लाँघ कर पर्वतमालाएं पार करसागर की सर्पीली लहरेंमैदानों में…See More
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . . विविध

मंजिल हर सोपान की, केवल है  अवसान ।मुश्किल है पहचानना, जीवन के सोपान ।। छोटी-छोटी बात पर, होने लगे…See More
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय चेतन प्रकाश भाई ग़ज़ल पर उपस्थित हो उत्साह वर्धन करने के लिए आपका हार्दिक …"
Monday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service