For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अचानक एक दिन
हुई उसके बचपन की हत्या
विवाह की वेदी ने दिया
एक नया घर-आँगन
एक नया रोल
एक नया अभिनय
एक नया डर...

अचानक एक दिन
ख़त्म हुई नादानियां
दफन हुईं लापरवाहियां
स्याह हुए स्वप्न
भोथरा गईं कल्पनाएँ....

अचानक एक दिन
उठाना पडा भारी-भरकम
संस्कारों का पिटारा
जिम्मेदारियों का बोझ
मानसिक-शारीरिक तब्दीलियाँ
और शिथिल हुए स्नायु-तंत्र...

दीखता नही दूर-दूर तक
इस मायाजाल से
निकलने का कोई द्वार
सूझता नही कोई समाधान
इसीलिए लिया उसने प्रण
अगली पीढी के साथ
ऐसा नही होने दूंगी....

और फिर खुल-खुल गईं
कई खिड़कियाँ,
संभावनाओं के कई द्वार......

(मौलिक अप्रकाशित)

Views: 322

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 14, 2014 at 3:52pm

बाल-विवाह के विरोध में आपकी यह कविता आवाज़ तो उठाती है लेकिन सार्थक प्रयास हुआ ऐसा नहीं कहूँगा. 

भाई विजय मिश्रजी के कहे से मैं भी सहमत हूँ.

सादर

Comment by विजय मिश्र on January 9, 2014 at 5:48pm
सुहैल भाई , नया साल मुबारक , कहीं कुछ है आपकी इस रचना में जो बेखटके नीचे नहीं उतर रहा है |पारम्परिक मर्यादाओं से मुक्ति तो तब भी नहीं और अब भी नहीं |संभावनाओं के कपाट खुले किन्तु उन्मुक्त और निरपेक्ष जीवन भी अचानक एकदिन उदासीन हो जाता है |भटकाव के भँवर में फंसाता है | सुंदर और सार्थक रचना केलिए धन्यवाद |
Comment by अरुन 'अनन्त' on January 9, 2014 at 11:44am

आदरणीय अनवर साहब बेहद उम्दा भाव, दर्द से शुरुआत की आपने और अंत जिस सकरात्मक सोच और सन्देश के साथ किया वाह दिल खुश हो गया. बहुत बहुत बधाई आपको इस सुन्दर रचना पर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 7, 2014 at 9:49pm

आपकी संवेदनशीलता इस रचना में दिखाई दे रही है बहुत बहुत बधाई आपको इस रचना के लिये

Comment by MAHIMA SHREE on January 7, 2014 at 8:42pm

आदरणीय अनवर सर ..इस रचना की भावभूमि के लिए आपका हार्दिक आभार ....ओर आपकी संवेदनशील लेखन के लिए ढ़ेरों बधाईयाँ.....सादर

Comment by coontee mukerji on January 7, 2014 at 8:30pm

बहुत सुन्दर रचना....हार्दिक बधाई.सादर

Comment by Meena Pathak on January 7, 2014 at 2:32pm

दीखता नही दूर-दूर तक 
इस मायाजाल से 
निकलने का कोई द्वार 
सूझता नही कोई समाधान 
इसीलिए लिया उसने प्रण
अगली पीढी के साथ 
ऐसा नही होने दूंगी....

और फिर खुल-खुल गईं 
कई खिड़कियाँ, 
संभावनाओं के कई द्वार......///// सकारात्मक सन्देश देती रचना के लिए बहुत बहुत बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे वसंत के - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब, अच्छे दोहे रचे आपने, बधाई स्वीकार करें । 'आगन में जिस के बसा, बालक…"
29 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रफ़ूगर
"आ. भाई बृजेश जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। हार्दिक बधाई। भाई समर जी के सुझाव से यह…"
4 hours ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post मन कैसे-कैसे घरौंदे बनाता है?
"आदरणीय समर कबीर साहेब , हार्दिक आभार आपका।"
8 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रफ़ूगर
"दूसरी बात 'दो' शब्द की जगह "दे" शब्द उचित होगा ,देखिएगा I  दरअसल…"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रफ़ूगर
"आदरणीय समर कबीर जी आपकी सूक्ष्म विवेचना से ग़ज़ल में निखार ही आएगा...जरूरी सुधार बिल्कुल किये जा सकते…"
10 hours ago
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"जी, बहुत शुक्रिया आदरणीय समर सर जी"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"जनाब बलराम धाकड़ जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें I  'पाँव कब्र में जो…"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post चन्दा मामा! हम बच्चों से (बालगीत) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ . भाई समर जी सादर अभिवादन। गीत पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
22 hours ago
Samar kabeer commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रफ़ूगर
"जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें…"
22 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी प्र्स्तुति पर बधाई स्वीकार करें I "
23 hours ago
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post मन कैसे-कैसे घरौंदे बनाता है?
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें I "
23 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post चन्दा मामा! हम बच्चों से (बालगीत) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब, अच्छा बाल गीत लिखा आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
23 hours ago

© 2023   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service