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अचानक एक दिन
हुई उसके बचपन की हत्या
विवाह की वेदी ने दिया
एक नया घर-आँगन
एक नया रोल
एक नया अभिनय
एक नया डर...

अचानक एक दिन
ख़त्म हुई नादानियां
दफन हुईं लापरवाहियां
स्याह हुए स्वप्न
भोथरा गईं कल्पनाएँ....

अचानक एक दिन
उठाना पडा भारी-भरकम
संस्कारों का पिटारा
जिम्मेदारियों का बोझ
मानसिक-शारीरिक तब्दीलियाँ
और शिथिल हुए स्नायु-तंत्र...

दीखता नही दूर-दूर तक
इस मायाजाल से
निकलने का कोई द्वार
सूझता नही कोई समाधान
इसीलिए लिया उसने प्रण
अगली पीढी के साथ
ऐसा नही होने दूंगी....

और फिर खुल-खुल गईं
कई खिड़कियाँ,
संभावनाओं के कई द्वार......

(मौलिक अप्रकाशित)

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 14, 2014 at 3:52pm

बाल-विवाह के विरोध में आपकी यह कविता आवाज़ तो उठाती है लेकिन सार्थक प्रयास हुआ ऐसा नहीं कहूँगा. 

भाई विजय मिश्रजी के कहे से मैं भी सहमत हूँ.

सादर

Comment by विजय मिश्र on January 9, 2014 at 5:48pm
सुहैल भाई , नया साल मुबारक , कहीं कुछ है आपकी इस रचना में जो बेखटके नीचे नहीं उतर रहा है |पारम्परिक मर्यादाओं से मुक्ति तो तब भी नहीं और अब भी नहीं |संभावनाओं के कपाट खुले किन्तु उन्मुक्त और निरपेक्ष जीवन भी अचानक एकदिन उदासीन हो जाता है |भटकाव के भँवर में फंसाता है | सुंदर और सार्थक रचना केलिए धन्यवाद |
Comment by अरुन 'अनन्त' on January 9, 2014 at 11:44am

आदरणीय अनवर साहब बेहद उम्दा भाव, दर्द से शुरुआत की आपने और अंत जिस सकरात्मक सोच और सन्देश के साथ किया वाह दिल खुश हो गया. बहुत बहुत बधाई आपको इस सुन्दर रचना पर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 7, 2014 at 9:49pm

आपकी संवेदनशीलता इस रचना में दिखाई दे रही है बहुत बहुत बधाई आपको इस रचना के लिये

Comment by MAHIMA SHREE on January 7, 2014 at 8:42pm

आदरणीय अनवर सर ..इस रचना की भावभूमि के लिए आपका हार्दिक आभार ....ओर आपकी संवेदनशील लेखन के लिए ढ़ेरों बधाईयाँ.....सादर

Comment by coontee mukerji on January 7, 2014 at 8:30pm

बहुत सुन्दर रचना....हार्दिक बधाई.सादर

Comment by Meena Pathak on January 7, 2014 at 2:32pm

दीखता नही दूर-दूर तक 
इस मायाजाल से 
निकलने का कोई द्वार 
सूझता नही कोई समाधान 
इसीलिए लिया उसने प्रण
अगली पीढी के साथ 
ऐसा नही होने दूंगी....

और फिर खुल-खुल गईं 
कई खिड़कियाँ, 
संभावनाओं के कई द्वार......///// सकारात्मक सन्देश देती रचना के लिए बहुत बहुत बधाई 

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