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हथियार
==========
क्या नारी ने
सारी शक्तिया
समाहित कर ली हैं
खुद में ही
या इस्तेमाल हो रही हैं
हथियार की तरह
या हथियार बन
उठ खड़ीं हो गयी हैं
खुद ही संघार
करने के लिए
पापियों का
क्या अच्छे लोग भी
फंस रहे हैं इस
मकड़जाल में
खूब की हमने भी
माथा पच्ची पर
भगवान् ना थे हम
कि सुन-समझ-देख पाए
आखिर मांजरा क्या हैं
समझ पाए कि कौन
इस्तेमाल हो रहा हैं
कौन किया जा रहा हैं
और कौन खुद ही
अनजाने में ही सही
इस्तेमाल हो चुका हैं
साक्षात् भगवान् भी
आ जाये आज तो
ना समझा पाए हमें
कारक कर्म और कर्ता
के बीच की कड़ी
असमंजस में हैं हम
किसे कहें सही
मरने वालों को या
जिन्दा रह
सारे आरोपों को
झेलने वालो को
इस असमंजस से
ये नारी तू ही हैं बस
जो उबार सकती हैं हमें
पर अफ़सोस तू
खामोश हैं|.


सविता मिश्रा
"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 650

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Comment by savitamishra on December 21, 2013 at 10:44pm

राजेश sis bahut bahut abhar apka ...

Comment by savitamishra on December 21, 2013 at 10:43pm

अरुण भैया धन्यवाद आपका ...गलतियों पर ध्यान दिलाने के लिए धन्यवाद ......क्या यहाँ इसे सही कर सकते हैं?

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 21, 2013 at 1:39pm

आदरणीया सविता जी मन के भीतर उठ रहे प्रश्नों को सुन्दरता से पिरोया है आपने. मांजरा को माजरा कर लें और दो - तीन जगह हैं की बजाय है होना चाहिए था कृपया देख लें. बधाई इस सुन्दर रचना पर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 20, 2013 at 8:08pm

सुन्दर विषय पर लिखा है आपने भाव बहुत अच्छे हैं ,सही कहा इस मकडजाल में कई बार सही लोग भी फंस जाते हैं खुद को कोई कितना बचाता है ये उसी पर निर्भर करता है ..सुन्दर प्रस्तुति 

Comment by savitamishra on December 20, 2013 at 7:07pm

coontee sis dhanyvaad apka

Comment by savitamishra on December 20, 2013 at 7:05pm

गिरिराज भाई तहेदिल से धन्यवाद

Comment by coontee mukerji on December 20, 2013 at 1:57pm

सविताजी, नीति तो कहती है मकड़जाल से दूर रहना ही बहतर है.सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 20, 2013 at 11:00am
आदरनीया , बहुत सुन्दर विषय पर आपने अच्छी रचना की है , दोनो के लिये आपको बधाई ॥
Comment by savitamishra on December 19, 2013 at 10:07pm

आभार आप सभी का ....

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on December 19, 2013 at 7:38pm

कविता के भाव गहरे हैं। सुन्दर प्रस्तुति। बधार्इ स्वीकारें।  सादर,

कृपया ध्यान दे...

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