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कविता - साहित्य दीप ! शब्दों की ज्योति !!

साहित्य दीप ! शब्दों की ज्योति !!

 

साहित्य दीप

शब्दों की ज्योति

अनुभव अनुभूति की ऊर्जा हो

विस्फोट नहीं दूषण भी नहीं

संस्कृति पर सार्थक चर्चा हो

 

विज्ञान सृजन की बाती हो

सभ्यता की जिसमे थाती हो

सब मौलिक हो नूतन भी हो

परहित कर मानव हर्षा हो

 

इस दीप पर्व पर मिल गायें

पद छंद शबद और कवितायेँ

तमसो माँ ज्योतिर्मय मन्त्र

शुभ लाभ की अविरल वर्षा हो

 

रोशनी महल से नुक्कड़ तक

समता राजा से फक्कड़ तक

माँ अन्नपूर्णा धन - धान भरें

कोई भूखा न प्यासा हो

 

भोले की अविनाशी काशी

मस्तों की मलंगो की काशी

काशी मुंशी भारतेंदु की

कबीरा की नानक की काशी

 

काशी तो स्वयं प्रकाशित है

काशी त्यौहार मनाये जब

यह देव लोक हो , ऐसा हो

वह विश्व गुरु के जैसा हो !

             - अभिनव अरुण

 { 31102013 - सर्वथा मौलिक एवं अप्रकाशित }

 

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Comment by Abhinav Arun on November 11, 2013 at 4:46am

हार्दिक आभार रचना के अनुमोदन - प्रोत्साहन के लिए आ. सुशील जी !

Comment by Sushil.Joshi on November 9, 2013 at 5:35am

सुंदर भावों का संप्रेषण है आ0 अभिनव जी.... बधाई स्वीकारें....

Comment by Abhinav Arun on November 4, 2013 at 1:49pm

रचना के सकारात्मक अनुमोदन के लिए हार्दिक आभार आ, राजेश जी , और हार्दिक बधाई दीपावली की !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 4, 2013 at 11:15am

इससे अच्छा पावन पर्व क्या होगा बहुत सुन्दर उच्च भाव से सम्रद्ध प्रस्तुति  हेतु दिल से बधाई. 

Comment by Abhinav Arun on November 4, 2013 at 4:56am

शुभ दीपावली आदरणीय श्री अरुण जी , हार्दिक शुभकामनायें प्रकाश पर्व पर !!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on November 3, 2013 at 2:57pm

काशी तो पूरनमासी है..............

सुंदरतम .................

शुभ दीपावली...........

Comment by Abhinav Arun on November 3, 2013 at 4:30am

आ. अन्नपूर्णा जी , आभार व् प्रकाश पर्व दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें !!

Comment by annapurna bajpai on November 2, 2013 at 11:36pm

  सुंदर भावों से सजी दीपावली कविता बधाई आपको । आ0 अभिनव अरुण जी । 

Comment by Abhinav Arun on November 2, 2013 at 2:21pm

श्री विजय जी रचना के अनुमोदन के लिए आभार आपका , और दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनायें !

Comment by Abhinav Arun on November 2, 2013 at 2:19pm

आदरणीय श्री गिरिराज जी अभिव्यक्ति को सराहने के लिए हार्दिक धन्यवाद !!

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