For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अधूरी लड़ाइयों का दौर

एक धमाका 
फिर कई धमाके 
भय और भगदड़....


इंसानी जिस्मों के बिखरे चीथड़े 
टीवी चैनलों के ओबी वैन 
संवाददाता, कैमरे, लाइव अपडेट्स 
मंत्रियों के बयान 
कायराना हरकत की निंदा 
मृतकों और घायलों के लिए अनुदान की घोषणाएं 


इस बीच किसी आतंकवादी संगठन द्वारा 
धमाके में लिप्त होने की स्वीकारोक्ति 
पाक के नापाक साजिशों का ब्यौरा 
सीसीटीवी कैमरे की जांच 
मीडिया में हल्ला, हंगामा, बहसें 
गृहमंत्री, प्रधानमन्त्री से स्तीफे की मांग 

दो-तीन दिनों तक

यही सब कुछ 
फिर अचानक किसी नाबालिग से बलात्कार 
किसी रसूखदार की गिरफ्तारी के लिए 
सड़कों पर धरना प्रदर्शन 
मोमबत्ती मार्च....
फिर कोइ नया शगूफा 
फिर कोई नया विवाद 

कितनी जल्दी भूल जाते हैं हम 
अपनी लड़ाइयों को 
कितनी जल्दी बदल लेते हैं हम मोर्चे....
अधूरी लड़ाइयों का दौर है ये 
अधूरे ख़्वाबों के जंगल में 
भटकने को मजबूर हैं सिपाही.....

 

 

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 271

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 3, 2013 at 12:31am

कविता की सार्थकता और उसके हेतु को ढूँढती ऐसी कोई कोशिश तनिक शाब्दिक तो बना देती है, परन्तु कभी-कभी सपाटबयानी अभिव्यक्ति की ताकत बन कर ही सामने आती है. 

धब्बे को धब्बा कहना रचनाकर्म नहीं है, सही है. लेकिन कई दफ़े ऐसा होता है,  संवेदना शिल्प और आचरण के आवरण नहीं चाहती. वह संवाद बनाना चाहती है.

प्रस्तुत कविता ऐसी ही मनोदशा में संवाद बनाने की प्रक्रिया का प्रतिफल बन कर उभरी है.  बहुत-बहुत बधाई हो.. .

हालाँकि, ऐसी कोशिश दोधारी तलवार पर चलने के समान हुआ करता है. अगर कविता सम्भल न पायी तो वही कोरी भाषणबाजी भर हो कर रह जाती है. कवि को सतत सचेत रहना पड़ता है.

सादर

.

Comment by ram shiromani pathak on September 30, 2013 at 8:32pm

वाह भाई बहुत बड़ी बात कह दी अपने जी //हार्दिक बधाई आपको //सादर 

Comment by विजय मिश्र on September 30, 2013 at 5:10pm
आजकी बेतरतीबी और उसमें उलझते ,बहकते इंसानों की बात जो बारदातों में फँसकर रह गयी है ,बेहद सलीके से पेश किया सुहैल भाई . आजका आदमी भूलता नहीं ,अनगिनत सितमों के चक्कर में भटककर रह जाता है ,उसकी मासूम परेशानियों पर तरस खाइए .

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 30, 2013 at 4:46pm
आदरणीय , शब्द शब्द सच बयान कर रहे हैं !!बेहतरीन रचना के लिये बहुत बधाई !!
Comment by Meena Pathak on September 29, 2013 at 3:59pm

कितनी जल्दी भूल जाते हैं हम 
अपनी लड़ाइयों को 
कितनी जल्दी बदल लेते हैं हम मोर्चे....
अधूरी लड़ाइयों का दौर है ये 
अधूरे ख़्वाबों के जंगल में 
भटकने को मजबूर हैं सिपाही.................. सही कहा आपने .... सुन्दर रचना, बधाई 

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on September 29, 2013 at 2:33pm

सही कहा आपने , हम भूल गए है की जब तक एक लड़ाई का परिणाम न निकल जाए दूसरी शुरू करना व्यर्थ है ! सुंदर कटाक्ष !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-148

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
10 hours ago
PHOOL SINGH posted a blog post

महाराणा प्रताप

महाराणा प्रताप चितौड़ भूमि के हर कण में बसता जन जन की जो वाणी थीवीर अनोखा महाराणा थाशूरवीरता जिसकी…See More
14 hours ago
जगदानन्द झा 'मनु' commented on जगदानन्द झा 'मनु''s blog post मैं कौन हूँ
"हार्दिक धन्यवाद भाई आदरणीय लक्ष्मण धामी जी और भाई आदरणीय Samar Kabeer जी, आप का मार्गदर्शन इसी तरह…"
18 hours ago
जगदानन्द झा 'मनु' posted a blog post

मैं कौन हूँ

मैं कौन हूँअब तक मैं अपना  पहचान ही नहीं पा सका भीड़ में दबा कुचला व्यथित मानवदड़बे में बंद…See More
yesterday
Zaif commented on Zaif's blog post ग़ज़ल - थामती नहीं हैं पलकें अश्कों का उबाल तक (ज़ैफ़)
"आ. बृजेश जी, बहुत आभार आपका।"
Sunday
Usha Awasthi posted a blog post

मन कैसे-कैसे घरौंदे बनाता है?

उषा अवस्थीमन कैसे-कैसे घरौंदे बनाता है?वे घर ,जो दिखते नहींमिलते हैं धूल में, टिकते नहींपर "मैं"…See More
Sunday
Rachna Bhatia posted a blog post

सदा - क्यों नहीं देते

221--1221--1221--1221आँखों में भरे अश्क गिरा क्यों नहीं देतेहै दर्द अगर सबको बता क्यों नहीं देते2है…See More
Sunday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर् आपके कहे अनुसार ऊला बदल लेती हूँ। ईश्वर आपका साया हम पर…"
Sunday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .

दोहा पंचक. . . .साथ चलेंगी नेकियाँ, छूटेगा जब हाथ । बन्दे तेरे कर्म बस , होंगे   तेरे  साथ ।।मिथ्या…See More
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"जी सृजन के भावों को मान देने और त्रुटि इंगित करने का दिल से आभार । सहमत एवं संशोधित"
Saturday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"'सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो इंसाफ़ को फ़िर लोग सदा क्यों नहीं देते' ऊला यूँ…"
Saturday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर्, "बिना डर" डीलीट होने से रह गया।क्षमा चाहती…"
Saturday

© 2023   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service