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ग़ज़ल - प्यार की बातें करें !!!

(२१२२, २१२२,२१२२,२१२)

नफरतों की बात छोड़ें, प्यार की बातें करें
दुश्मनों को रहने दें, दिलदार की बातें करें ।

तोड़ दें हथियार सारे, फेंक दें तलवार भी
क्या बुरा जो हम कलम की धार की बातें करें ।

'गोधरा' के भूत को फिर याद कर होगा भी क्या
ईद-होली और कुछ त्यौहार की बातें करें ।

है सियासत, खेल-कारोबार है, सब कुछ तो है
मेज पर रक्खे हुए अखबार की बातें करें ।

गाँव कस्बे और फिर इस शहर की बातें हुई
आज छत पर बैठकर संसार की बातें करें ।

दिल लगा फिर भूल बैठे, फिर किसी से दिल लगा
हम कभी तो प्यार के विस्तार की बातें करें । 

- आशीष नैथानी 'सलिल'
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 531

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Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on July 26, 2013 at 7:41pm

बहुत-बहुत शुक्रिया वीनस भाई जी |

Comment by वीनस केसरी on July 26, 2013 at 3:56am

बहुत खूब आशीष जी

ग़ज़ल के लिए बधाई और दाद क़ुबूल करें

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on July 21, 2013 at 8:02pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी, आदरणीय अभिनव अरुण जी, बहुत-बहुत शुक्रिया !!!

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on July 21, 2013 at 8:01pm

भाई केतन परमार जी, भाई राज नवादवी जी तहेदिल से शुक्रिया आपका !!!

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on July 21, 2013 at 7:59pm

हार्दिक धन्यवाद् आदरणीया गीतिका जी, आदरणीय जीत जी.....

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on July 21, 2013 at 7:58pm

बहुत-बहुत शुक्रिया भाई अरुण जी, आदरणीया कुंती जी, भाई बृजेश जी !!

Comment by Abhinav Arun on July 19, 2013 at 9:45pm

है सियासत, खेल-कारोबार है, सब कुछ तो है 
मेज पर रक्खे हुए अखबार की बातें करें । 
क्या कहने वाह आशीष जी बहुत ही सशक्त और प्रभावशाली ग़ज़ल हुई है बहुत बहुत बधाई !!

Comment by annapurna bajpai on July 19, 2013 at 12:35pm

आ० आशीष जी बहुत ही सुंदर एवं विचार परक गज़ल के लिए आभार ।

Comment by Ketan Parmar on July 19, 2013 at 11:50am

दिल लगा फिर भूल बैठे, फिर किसी से दिल लगा
हम कभी तो प्यार के विस्तार की बातें करें ।

bhot umda sher bhai badhai ho

Comment by राज़ नवादवी on July 19, 2013 at 9:22am

अच्छे मिजाज़ की ग़ज़ल!

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