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मेरी प्यारी भारत माँ

जब देखता हूँ इस युग के भारतवर्ष के मंत्रियों को
खौल उठता है दिल जब देखता हूँ भ्रष्टाचारियों को
हर सड़क पर खुदे हैं गड्ढे
हर गली में कचरों की भरमार
हर रोज़ अख़बारों में हत्या का समाचार
राजधानी होकर भी हर रोज़ होता बलात्कार
सदाचारियों से सरकार का नहीं कोई सारोकार
गरीबी बढती दिन पर दिन
सरकार करती रोज़ भ्रष्टाचार
सदाचारी मंत्रियों की बढती दरकार
दुष्कर्मियों पर परोपकार
सद्कर्मियों का तिरस्कार
मंत्रियों के पास धन की भरमार
आम नागरिकों को रोटी, कपडा ,मकान की दरकार
सत्यवादियों का तिरस्कार
भ्रष्टाचारियों को धन अपार
फिर भी मौन होने का ढोंग रचती सरकार
देश से नहीं इन्हें दौलत से है प्यार
रो रही मेरी भारत माता तड़फ तड़फ कर
हम जैसे पुत्र जो सदाचारी है माँ को अब नहीं रोते देख सकते
अब कदम उठाकर अपने देश को सुधारने हैं चलते
अपने कर्म को प्राथमिकता और दौलत का मोह हैं त्यागते
अपनी माँ का आंचल हैं थामते
उनके मुख को फिर से मुस्कराहट से हैं भरते
जय मेरी प्यारी भारत माँ , हम सदा ही आपको वदते ||

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Comment by Ashok Kumar Raktale on June 3, 2013 at 7:57pm

वर्त्तमान परिस्थितियों पर सुन्दर रचना.

Comment by coontee mukerji on May 28, 2013 at 2:03pm

दूबे जी , आपकी रचना में हर भले नागरीक की आवाज़ छुपी हुई है . प्रयास अच्छी है. /

सादर

 कुंती .

Comment by Abhinav Arun on May 27, 2013 at 8:46pm

श्री रोहित जी लिखते रहिये । भाव और प्रवाह बनते बनते आने वाली चीज है । हम सब उसी पथ के राही है । 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 27, 2013 at 6:48pm

हालातेहाजरा पर अंतर का आक्रोश मुखरित हो उठा है..

पर गठन अभी और कसाव मांगता है 

हार्दिक बधाई इस अभिव्यक्ति पर.

Comment by Rohit Singh Rajput on May 27, 2013 at 6:09pm

wah kya khoob likhi h....dil bhar aya bharat mata k lie

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