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आप सब को मजदूर दिवस की हार्दिक शुभकामनायें 

मजदूर

मजबूर हूँ मजदूरी से पेट का 

गुजरा अब हाथ से निकल रहा, 

अब हम चुप कब तक रहे, 

हृदय हमारा पिघल रहा, 

मेहनत करके नीव रखी देश की, 

अब सब बिफल रहा, 

अपने हकों के लिए चुना नेता, 

देखो हम को ही निगल रहा, 

डिग्री लेकर कोई इंजिनियर 

कुर्सी पर जो रोब जमता है

देखा जाय तो बिन मजदूर के 

वो रेस का लंगड़ा घोडा है, ..........रचना- राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

http://bikhareakshar.blogspot.in/

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Comment

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Comment by Ashok Kumar Raktale on May 3, 2013 at 11:09pm

सादर कल्पना को साकार करने के लिए श्रम और श्रमिक की आवश्यकता होती है. वरना आपकी कल्पनाशीलता को कोई नहीं जाँ पायेगा. बहुत सुन्दर रचना आदरणीय.

Comment by बृजेश नीरज on May 1, 2013 at 10:16pm

आदरणीय मजदूर दिवस की आपको भी हार्दिक शुभकामनाएं! सादर!

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 1, 2013 at 9:21pm

आ0 राजेन्द्र जी,   मजदूर जो मजदूरी करता है, एक अच्छा महल, सड़क, कारखाना, कलपुर्जे, और वह सारी वस्तुएं बनाता है- जिसके बगैर कोई पूंजीपति या मजदूर से इतर व्यक्ति एक पल भी जी नहीं सकता है।    बस वह  अधूरा..अपंग ही है।    हार्दिक बधाई स्वीकारें।  सादर,

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