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माँ का प्यार : सुगंधित बयार"

माँ का प्यार : सुगंधित बयार
माँ तुझे सलाम!

माँ, समूची धरती पर बस यही एक रिश्ता है जिसमें कोई छल कपट नहीं होता। कोई स्वार्थ, कोई प्रदूषण नहीं होता। इस एक रिश्ते में निहित है अनंत गहराई लिए छलछलाता ममता का सागर। शीतल, मीठी और सुगंधित बयार का कोमल अहसास। इस रिश्ते की गुदगुदाती गोद में ऐसी अनुभूति छुपी है मानों नर्म-नाजुक हरी ठंडी दूब की भावभीनी बगिया में सोए हों।

माँ, इस एक शब्द को सुनने के लिए नारी अपने समस्त अस्तित्व को दाँव पर लगाने को तैयार हो जाती है। नारी अपनी संतान को एक बार जन्म देती है। लेकिन गर्भ की अबोली आहट से लेकर उसके जन्म लेने तक वह कितने ही रूपों में जन्म लेती है। यानी एक शिशु के जन्म के साथ ही स्त्री के अनेक खूबसूरत रूपों का भी जन्म होता है।

पल- पल उसके ह्रदय समुद्र में ममता की उद्दाम लहरें आलोडि़त होती है। अपने हर 'ज्वार' के साथ उसका रोम-रोम अपनी संतान पर न्योछावर होने को बेकल हो उठता है। नारी अपने कोरे कुँवारे रूप में जितनी सलोनी होती है उतनी ही सुहानी वह विवाहिता होकर लगती है लेकिन उसके नारीत्व में संपूर्णता आती है माँ बन कर। संपूर्णता के इस पवित्र भाव को जीते हुए वह एक अलौकिक प्रकाश से भर उठती है। उसका चेहरा अपार कष्ट के बावजूद हर्ष से चमकने लगता है। उसकी आँखों में खुशियों के सैकड़ों दीप झिलमिलाने लगते हैं।


लाज और लावण्य से दीपदिपाते इस चेहरे को किसी भाषा, किसी शब्द और किसी व्याख्या की आवश्यकता नहीं होती। 'माँ' शब्द की पवित्रता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि हिन्दू धर्म में देवियों को माँ कहकर पुकारते है। बेटी या बहन के संबोधनों से नहीं। मदर मैरी और बीवी फातिमा का ईसाई और मुस्लिम धर्म में विशिष्ट स्थान है।

माँ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक दिवस नहीं एक सदी भी कम है। किसी ने कहा है ना कि सारे सागर की स्याही बना ली जाए और सारी धरती को कागज मान कर लिखा जाए तब भी माँ की महिमा नहीं लिखी जा सकती।

"मातृ दिवस पर हर माँ को उसके अनमोल मातृत्व की बधाई।"






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Comment by asha pandey ojha on May 9, 2010 at 6:23pm
माँ, इस एक शब्द को सुनने के लिए नारी अपने समस्त अस्तित्व को दाँव पर लगाने को तैयार हो जाती है। नारी अपनी संतान को एक बार जन्म देती ..bahut sahee likha aapne raju ji ..tabhee to wo maa hotee hai ..!
Comment by Kanchan Pandey on May 9, 2010 at 10:33am
bahut badhiya likha hai, aap ki aek aek baat bilkul sahi hai,good,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on May 9, 2010 at 10:24am
bahut badhiya likha hai aapne raju bhai.....aaj mothers day ke avasar par aapki itni acchi rachna aayi iske liye dil se aapka abhivadan hai.......
maa ke jaisi is duniya me aur kuch nahi hai.....
Comment by Admin on May 9, 2010 at 9:58am
'माँ' शब्द की पवित्रता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि हिन्दू धर्म में देवियों को माँ कहकर पुकारते है। बेटी या बहन के संबोधनों से नहीं। मदर मैरी और बीवी फातिमा का ईसाई और मुस्लिम धर्म में विशिष्ट स्थान है।

माँ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक दिवस नहीं एक सदी भी कम है। किसी ने कहा है ना कि सारे सागर की स्याही बना ली जाए और सारी धरती को कागज मान कर लिखा जाए तब भी माँ की महिमा नहीं लिखी जा सकती।
राजू जी, आप ने सही लिखा है कि माँ के लिए एक दिन क्या पूरा जीवन ही कम पड़ जयेगा, माँ तो माँ है जो अतुल्नीय है, और माँ के बारे जितना भी लिखा जाय वो बहुत ही कम है, बहुत बहुत धन्यबाद है राजू जी इस पोस्ट के लिये ।

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