गैस होगी न कोयला होगा
चूल्हा ग़मजदा मिला होगा
पेट रोटी टटोलता हो जब
थाल में अश्रु झिलमिला होगा
भूख की कैंचियों से कटने पर
सिसकियों से उदर सिला होगा
चाँद होगा न चांदनी होगी
ख़्वाब में भी तिमिर मिला होगा
भोर होगी न रौशनी होगी
जिंदगी से बड़ा गिला होगा
लग रहा क्यूँ हुजूम अब सोचूँ
मौत का कोई काफिला होगा
बेबसी की बनी किसी कब्र पर
नफरतों का पुहुप खिला होगा
अब बता "राज"दोष है किस का
जिंदगी ने उसे छ्ला होगा
Comment
आने वाले दिनों में क्या होगा
मैं तुझे भूल जाऊँगा इक दिन
वक़्त सब कुछ बदल चुका होगा
आदरणीया राजेश कुमारीजी, उस हिसाब से तो काफ़िया पर ही बात अँटक जाती है. आपके मतले के अनुसार काफ़िया ’अला’ निर्धारित होता है. लेकिन कई शेर में काफ़िया ’इला’ लिया गया है.
कब्र की मात्रा २ कैसे हो सकती है ? यह शब्द के लिहाज से २ १ होगी और उच्चारण के लिहाज से १ २ .
सादर
आदरणीय सौरभ जी पकड़ लिया आपने सच में मैं सोच ही रही थी चूल्हे शब्द पर अटक रही थी पर कोई और शब्द सूझ नहीं रहा था इसलिए इसे ही डरते डरते लिख दिया आप इसकी जगह कोई और शब्द सुझा सकें तो प्लीज !!हार्दिक आभार आपका दूसरे शेर में क्या आपका इशारा कब्र की मात्र से है मैंने इसे 2 गिना है गलत है क्या ??
आपका निरंतर प्रयास आश्वस्त करता है, आदरणीया राजेशकुमारीजी. बहुत उम्दा प्रयास हुआ है. बेहतर भाव और कहन से समृद्ध इस ग़ज़ल के लिये हार्दिक बधाई.
शिल्प के लिहाज से कुछ शेर अभी और मशक्कत की मांग कर रहे हैं. सरसरी तौर पर तो जैसे मतले के सानी में चूल्हा को १ २ के वज़्न में बाँधने में तक़लीफ़ हो रही है .. :-))
या, बेबसी की बनी किसी कब्र पर को भी एक बार पुनः देख लीजियेगा.
इस शेर के लिये विशेष बधाई स्वीकार करें -
भूख की कैंचियों से कटने पर
सिसकियों से उदर सिला होगा
वाह ! वाह !
आदरणीय प्रदीप कुशवाह जी हार्दिक आभार
भूख की कैंचियों से कटने पर
सिसकियों से उदर सिला होगा
adarniya rajesh kumari jii,
saadar abhivadan
nishchit hi jindagi ne chala hae.
badhai
फूल सिंह जी आपको रचना पसंद आई हार्दिक आभार
नादिर खान जी आपको रचना पसंद आई दिल से शुक्रिया
राजेश जी प्रणाम....
बहुत भावपूर्ण सत्य को उजागर करती रचना के लिए बधाई...
फूल सिंह
गैस होगी न कोयला होगा
आसुओं से चूल्हा जला होगा
भूख की कैंचियों से कटने पर
सिसकियों से उदर सिला होगा
राजेश कुमारी जी ,उत्तम सोच के साथ लिखी गई गंभीर रचना के लिए बधाई ।
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