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इन्सान की जिंदगी

 

इन्सान की जिंदगी भी

क्या जिंदगी है

पल में गम,

और क्षण में ख़ुशी है

कभी संघर्ष का दौर तो

कभी मस्ती भरी है

 

कभी अपने पराये तो

पराये अपने है

जिसको ख़ुशी दी

उसी ने दिल दुखायें है

फिर भी लोगो ने देखो

बंधन हर निभाए है

कभी सपने सजोंये और

कभी ख़ुशी के दीप जलाये है

 

विरह वेदना से छुड़ा

अनुभूति वक़्त दे जाती है

हर्ष उल्लास के गीत सुना

दुःख से मुक्त कराती है

हंसी हंसी में

अश्रु से नयन भिगो

जीवन सत्य का बोध कराती है

इन्सान की जिंदगी भी

क्या जिंदगी है

 

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Comment

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Comment by PHOOL SINGH on September 3, 2012 at 12:55pm

लक्ष्मण  जी, प्रणाम..........

आपका बहुत बहुत धन्यवाद ......

फूल सिंह

Comment by PHOOL SINGH on September 3, 2012 at 12:54pm

पाण्डेय जी, प्रणाम..........

आपका बहुत बहुत धन्यवाद ......

फूल सिंह

Comment by PHOOL SINGH on September 3, 2012 at 12:53pm

रेखा जी, प्रणाम..........

आपका बहुत बहुत धन्यवाद ......

फूल सिंह

Comment by Rekha Joshi on September 2, 2012 at 6:54pm

इन्सान की जिंदगी भी

क्या जिंदगी है

पल में गम,

और क्षण में ख़ुशी है

कभी संघर्ष का दौर तो

कभी मस्ती भरी है,यही तो है जिंदगी फूल सिंह जी ,बहुत बढ़िया रचना ,बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 2, 2012 at 3:14pm

आपका मंच पर हार्दिक स्वागत है, फूल सिंह जी.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 1, 2012 at 6:58pm

इंसान की जिन्दगी भी क्या जिंदगी है ? भाई फूल सिंह जी असल में यही जिंदगी है जिसमे कभी धूप काकभी छाँव है |

अच्छी रचना बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 1, 2012 at 6:34pm
आदरणीय फूल सिंह जी ज़िन्दगी के दोनों पहलुओं को यथार्थता से संप्रेषित करती इस रचना हेतु हार्दिक बधाई
Comment by PHOOL SINGH on September 1, 2012 at 5:03pm

शर्मा जी , सादर प्रणाम,

आपका बहुत धन्यवाद .....

फूल सिंह

Comment by PHOOL SINGH on September 1, 2012 at 5:02pm

संदीप  जी , सादर प्रणाम,

आपका बहुत धन्यवाद .....

फूल सिंह

Comment by PHOOL SINGH on September 1, 2012 at 5:02pm

गणेश जी , सादर प्रणाम,

आपका बहुत धन्यवाद .....

फूल सिंह

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