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कहीं लब पर तराने हैं मुहब्बत के फ़साने हैं.

सुहाने दिन तेरी आगोश में मुझको बिताने हैं.

फिजा में ये हवायें भी तेरे दम से महकती हैं,

सुना है हीर की खातिर कई रांझे दिवाने हैं...


****************************************

यहाँ सब लोग तेरे हुश्न के किस्से सुनाते हैं.

अधर ये शबनमी उसके मुझे अक्सर रिझाते हैं.

बहुत बेचैन है ये दिल उड़ी है नींद आँखों से,

कटीले दो नयन तेरे बहुत मुझको सताते हैं..

******************************************************************

समयाभाव के चलते जल्दबाजी में दो मुक्तक लिख दिए हैं गुरुजनों एवं अग्रजों से निवेदन है की उचित मार्गदर्शन एवं अपना  आशीर्वाद प्रदान करें.

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Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on July 12, 2012 at 7:00pm

आदरणीया डॉ. प्राची मैम आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया और उत्साहवर्धन के लिए ह्रदय से कोटि कोटि नमन एवं आभार

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on July 12, 2012 at 6:59pm

आदरणीया Rekha Joshi मैम सादर नमन उत्साहवर्धन एवं आशीर्वाद प्रदान करने के लिए बहुत बहुत आभार

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on July 12, 2012 at 6:58pm

आदरणीय अरुण "अनंत" जी उत्साहवर्धन एवं प्रतिक्रिया  लिए बहुत बहुत आभार

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on July 12, 2012 at 6:56pm

आदरणीय संदीप सर उत्साहवर्धन एवं आशीर्वाद प्रदान करने के लिए बहुत बहुत आभार

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on July 12, 2012 at 6:55pm

आदरणीय वाहिद  सर उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत आभार सादर नमन

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on July 12, 2012 at 6:54pm

आदरणीया राजेशकुमारी मैम सादर नमन उत्साहवर्धन एवं आशीर्वाद प्रदान करने के लिए बहुत बहुत आभार

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on July 12, 2012 at 6:53pm

आदरणीय अलबेला सर सादर नमन उत्साहवर्धन एवं आशीर्वाद प्रदान करने के लिए बहुत बहुत आभार


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 12, 2012 at 6:45pm

बहुत सुन्दर मधुर सुप्रवाह लिए मुक्तकों के लिए बहुत बहुत बधाई प्रिय शैलेन्द्र मृदु जी

Comment by Rekha Joshi on July 12, 2012 at 1:40pm

अति सुंदर मुक्तक शैलेन्द्र जी ,बधाई 

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 12, 2012 at 12:47pm

वाह क्या बात है , अति सुन्दर  बधाई

कृपया ध्यान दे...

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