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===========|| नैन ||==========

मन भावन है गोरी तेरे नैनो की प्यारी भाषा
इन गहरे नैनो में अब तो बसने की है अभिलाषा
देखा जबसे इन नैनो को किस दुनिया में डूबा हूँ
डूबा डूबा सोचे ये मन इन नैनो की परिभाषा

इन नैनो से होती वर्षा चाहत वाले तीरों की
इस वर्षा में बहते हैं सब ताकत क्या है वीरों की
इन तीरों से घायल मन ने अब तो सब कुछ  है हारा
घायल होने से बच जाना बातें हैं तकदीरों की

देखे तेरे नैना प्यारे चाहत के अंकुर फूटे
इनका झुकना इनका उठना मेरा पागल मन लूटे
इन नैनों में बस जाना ही अब तो मेरी चाहत है
इनमे बसने की चाहत में चाहे सारा जग छूटे

संदीप पटेल "दीप"

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 24, 2012 at 7:38pm

देखे तेरे नैना प्यारे चाहत के अंकुर फूटे
इनका झुकना इनका उठना मेरा पागल मन लूटे

एक बार पुनः एक सुन्दर रचना की प्रस्तुति, वाह |

Comment by आशीष यादव on May 24, 2012 at 11:05am
वाह संदीप सर, एक और सुन्दर रचना।
Comment by आशीष यादव on May 24, 2012 at 11:05am
वाह संदीप सर, एक और सुन्दर रचना।

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