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       (चतुष्क-अष्टक पर आघृत)

पदपदांकुलक छंद (१६ मात्रा अंत में गुरू)

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सपनों पर जीत उसी की है,

जिसके मन में अभिलाषा है.

वह क्या जीतेंगे समर कभी,

जिनके मन घोर निराशा है ..

 

चींटी का सहज कर्म देखो,

चढ़ती है फिर गिर जाती है.

अपनें प्रयास के बल पर ही,

मंजिल वह अपनी पाती है..

 

 स्वप्न की उन्नत परिभाषा,

क्या तुमने कभी विचारी है.

जिनके सपनें न पूर्ण हुए,

दिखती उनकी लाचारी है..

 

है स्वप्न सत्य या वृथा है ये?

कहने को सिर्फ कथा है ये?

उस जन को ही पहचान मिली,

जिसने भव सिन्धु मथा है ये..

 

देखे ना  होते स्वप्न अगर,

क्या व्योम चन्द्र पर जा पाते.

धरती अम्बर की दूरी का ,

क्या कोई पता लगा पाते ..

 

वह स्वप्न शून्य सा लगता जो,

मंजिल से हमें मिला न सके.

वह जीवन भी जीवन क्या है,

सपनों  का फूल खिला न सके..

                                                     शैलेन्द्र कुमार सिंह 'मृदु'

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Comment by अरुण कान्त शुक्ला on April 16, 2012 at 6:46pm

चींटी का सहज कर्म देखो,

चढ़ती है फिर गिर जाती है.

अपनें प्रयास के बल पर ही,

मंजिल वह अपनी पाती है..

नर हो ना निराश करो मनको .. की याद आ गयी | अच्छी लगी , कैसे तारीफ़ करूँ , मुझे ठीक से ये विधा नहीं आती | क्षमा करेंगें |

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 6, 2012 at 10:28pm

आदरणीय जवाहर सर सादर नमन , सराहना हेतु कोटि कोटि धन्यवाद

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 6, 2012 at 10:27pm

आदरणीय प्रदीप सर आप लोंगों से सीख कर लिखने का प्रयास करता हूँ ,उत्साहवर्धन हेतु ह्रदय से आभार

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 6, 2012 at 10:22pm

वह स्वप्न शून्य सा लगता जो,

मंजिल से हमें मिला न सके.

वह जीवन भी जीवन क्या है,

सपनों  का फूल खिला न सके

आदरणीय मृदु  जी, सादर अभिवादन! बहुत ही सुन्दर और प्रेरणादायी लगी आपकी रचना बधाई!

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 6, 2012 at 10:13pm

rachna feature hone par badhai.

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 6, 2012 at 11:55am

आदरणीया महिमा जी कृति को सराहना प्रदान करने हेतु बहुत बहुत आभार

Comment by MAHIMA SHREE on April 6, 2012 at 11:46am
वह स्वप्न शून्य सा लगता जो,

मंजिल से हमें मिला न सके.

वह जीवन भी जीवन क्या है,

सपनों का फूल खिला न सके..प्रिय मुदु जी नमस्कार ,
बहुत सुंदर ...बहुत सुंदर ... अपने पे विश्वास जगाती बधाई स्वीकार करे
Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 6, 2012 at 10:55am

आशीष जी सराहना के लिए ह्रदय से आभार

Comment by आशीष यादव on April 5, 2012 at 10:57pm
एक प्रभावी रचना है। अपना पूरा प्रभाव छोड़ने मे सफल है। जोश भी है और कर्म की प्रेरणा भी।
बधाई स्वीकारेँ
Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 5, 2012 at 3:40pm

आदरणीय संजय सर सादर नमन ,उत्साहवर्धन के लिए कोटि कोटि धन्यवाद

कृपया ध्यान दे...

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