For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज भी बदक़िस्मती का वो ज़माना याद है...

आज भी बदक़िस्मती का वो ज़माना याद है ।

एक ज़वा बेटे का दरया डूब जाना याद है ।


क्या सुनाए कोई नग़मा क्या पढ़ें अब हम ग़ज़ल,
ग़म में डूबा ज़िन्दगी का बस फसाना याद है ।

जश्ने-होली खो गई दीवाली फीक़ी पड़ गई,
अब फ़क़त हर साल इनका आना-जाना याद है ।

सोचते थे अब तलक़ वो छुप गया होगा कहीं,
लौट कर  आया नहीं उसका बहाना याद है ।

कर रहे थे बाग़बानी हम बड़े ही प्यार से,
आज भी उस ख़ुशनुमा गुल को गॅवाना याद है ।

कैसे भूलें खिरमने-दिल पर गिरी थीं बिज़लियाँ,
तिनके-तिनके से बना वो आशियाना याद है ।

जिस घ्ड़ी मैं ले चला बंटे की मय्यत दोश पर,
आँखें थीं नमदीदा फिर भी मुस्कराना याद है ।

क्या सुनाए नग़म-ए-क़ैफोतरब ‘‘अफ़सोस’’ हम,
ग़म में डूबा ज़िन्दगी का बस तराना याद है ।

Views: 161

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 26, 2011 at 11:57am

आदरणीय अफ़सोससाहब,  एक विभूति के अफ़सोस बन जाने की प्रक्रिया को तिल-तिल समेटना आँखों की निर्निमेष कोर को पनिया गया. घोष-स्वर में सुनना और फिर छूना...  आह ! साहब.. .!!  कुछ बीत चुके पल यों होते हैं जिनका वज़ूद पत्थर के पटल पर बनी लहरों की तरह अबूझ किन्तु कालजयी-सा होता है. हम सभी बस तमाशबीन हैं साहब, पत्थरों पर बनी उन दिल के नाज़ुक हिस्से को काढ़ लेने वाली लहर-लकीरों को जानते-बूझते हुए भी मूक बने उनमें प्रकृति की खूबसूरती निहारते हैं.

 

आपकी ऊर्जा हम सभी को उत्प्रेरित करे, अफ़सोस साहब.

संप्रेषण के साधन आपके समय से आज भले बदल गये हैं लेकिन विधा तो वही है. बस काग़ज़-कलम की जगह हाथ में की-बोर्ड आगया है भाव-शब्द उकेरने के क्रम में उंगलियों को थिरकाने को... !!  आपसे बहुत कुछ सुनना है.

 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 26, 2011 at 11:19am

//आज भी बदक़िस्मती का वो ज़माना याद है ।

एक ज़वा बेटे का दरया डूब जाना याद है //

आह ! मतला दिल को चिर देने वाला है, कुछ बातें तो मरने के बाद ही भूलती हैं |


//क्या सुनाए कोई नग़मा क्या पढ़ें अब हम ग़ज़ल,
ग़म में डूबा ज़िन्दगी का बस फसाना याद है //

कभी कभी उन्ही फसानों से जीने का मकसद मिल जाता है, बढ़िया शे'र गाजीपुरी जी, सीधे ह्रदय को बेध रहा है | 

//जश्ने-होली खो गई दीवाली फीक़ी पड़ गई,
अब फ़क़त हर साल इनका आना-जाना याद है//

 वाजिब ही है, बगैर अपनों  के क्या होली क्या दिवाली, सब दिन एक जैसा ही है, बल्कि आम दिनों से ज्यादा वो त्यौहार के दिन सलते हैं |

//सोचते थे अब तलक़ वो छुप गया होगा कहीं,
लौट कर  आया नहीं उसका बहाना याद है //

बहुत दर्द है इस शेर में साहब |

//कर रहे थे बाग़बानी हम बड़े ही प्यार से,
आज भी उस ख़ुशनुमा गुल को गॅवाना याद है//

पुनः दर्द के ओस से भीगा एक शेर |


//कैसे भूलें खिरमने-दिल पर गिरी थीं बिज़लियाँ,
तिनके-तिनके से बना वो आशियाना याद है//

अच्छा शेर, दर्द को महसूस किया जा सकता है |

//जिस घ्ड़ी मैं ले चला बंटे की मय्यत दोश पर,
आँखें थीं नमदीदा फिर भी मुस्कराना याद है//

वोह, हे प्रभु !

//क्या सुनाए नग़म-ए-क़ैफोतरब ‘‘अफ़सोस’’ हम,
ग़म में डूबा ज़िन्दगी का बस तराना याद है//

इन तरानों के बल पर ही जीवन की नैया पार करनी है, दाद भी नहीं दे सकता इस ग़ज़ल पर,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

TEJ VEER SINGH commented on Dimple Sharma's blog post वहाँ एक आशिक खड़ा है ।
"हार्दिक बधाई आदरणीय डिंपल शर्मा जी।अच्छी गज़ल। गुलाबों में कांटे बहुत है ।गुलाबों से मन भर रहा है…"
24 minutes ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post अपराध बोध - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय डिंपल शर्मा जी।अच्छा विश्लेषण किया आपने लघुकथा का।"
28 minutes ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post अपराध बोध - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब जी।आदब।"
31 minutes ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"//हिन्दी वर्णमाला में आज भी नुक्ता वाले अक्षर नहीं हैं। मैंने आम बोलचाल में आने वाले शब्दों का…"
9 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
9 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"आदरणीय Ram Awadh VIshwakarma साहिब, आपको ग़ज़ल की पेशकश पर बधाई। जनाब मैं ये समझने में पूरी तरह…"
9 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post करेगा तू क्या मिरी वकालत (ग़ज़ल)
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' साहिब, जी नहीं नहीं, मैं भी नौ-मश्क़ शाइर ही हूँ, इसलिए कई बार…"
10 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ख़ुदा ख़ैर करे (ग़ज़ल)
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' साहिब, ग़ज़ल तक आने के लिए और अपनी अमूल्य उत्साहवर्धक टिप्पणी देने…"
10 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जो तेरी आरज़ू (ग़ज़ल)
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' साहिब, आपकी हौसला-अफ़ज़ाई के लिए तह-ए-दिल से आपका आभारी हूँ! आप जिस…"
10 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"आदरणीय दयाराम जी आदाब। ग़ज़ल पसन्द करने के लिए सादर आभार"
11 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"आदरणीया डिम्पल शर्मा जी आदाब। ग़ज़ल सराहना एवं उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
11 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ जी। सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर टिप्पणी एवं उत्साह वर्धन के लिए हृदय से आभार"
11 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service