आज तिमिर का नाश हुआ
दीपों की लगी कतार
कार्तिक अमावस्या लेकर आई
यह आलोकित उपहार
द्वार द्वार पर दीप जलें
घर घर हुआ श्रृंगार
हर देहरी प्रदीप्त हुई
बिखरा हर्ष अपार
झाड़ बुहार आँगन को
लक्ष्मी को दें आमंत्रण
करबद्ध हो सब करें
मन से रमा का वंदन
सभी को शुभ दीपावली...
दुष्यंत..........
Comment
भाई दुष्यंत जी ! आपकी कविता बहुत खूबसूरत है .......इस निमित्त हार्दिक बधाई मित्र .....दीपावली की शुभकामनायें !
प्रकाशपर्व पर अति सुन्दर प्रभावशाली रचना !!
dhanyavaad sir, naya varsh aap ke liye sukh samriddhi evam shree dayak ho...yahi mangal kaamna hai....
दीपावली आयी.. हुई और मन में रह गयी. शुभ-शुभ होता रहे.
शुभेच्छा
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