For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तरही ग़ज़ल नम्बर 2,कुछ नये क़वाफ़ी के साथ ।

फाइलातून फ़ाइलातुन फाइलुन

दुश्मन-ए-जाँ लरज़ह  बर अंदाम है

जब तलक ज़िन्दा हमारा नाम है

सोचने की क़ुव्वतें मफ़लूज हैं

मुल्क में सबको हुआ सरसाम है

चूस लेती है बदन का ये लहू

शाइरी भी कितनी ख़ूँँ  आशाम है

उसको छूने से भी मुझको डर लगे

इस क़दर नाज़ुक वो गुल अंदाम है

ये तो दीवानों की बस्ती है "समर"

तुम यहां क्यों आ गए क्या काम है

---------

लरज़ह बर अंदाम--कांपना

मफ़लूज--अपाहिज,जिसे फ़ालिज मार गया हो ।

सरसाम--एक बीमारी जिसमें सर में वरम(सूजन)आ जाती है ।

खूँ आशाम--ख़ून चूसने वाली ।

गुल अंदाम---फूल सा बदन

मौलिक/अप्रकाशित

Views: 498

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ravi Shukla on January 4, 2018 at 9:45am

आदरणीय समर साहब फिर से आपकी एक उम्दा ग़ज़ल पढ़ने को मिली और जैसी कि उम्मीद थी आपसे, नए नए  काफियों पर इस आसान बह्र में अच्छे अशआर पढ़ने को मिले।  कामयाब ग़ज़ल के लिए शेर दर शेर मुबारक बाद कुबूल करें। 

Comment by नादिर ख़ान on January 1, 2018 at 6:14pm

चूस लेती है बदन का ये लहू

शाइरी भी कितनी ख़ूँँ  आशाम है ...सही फ़रमाया जनाब 

उसको छूने से भी मुझको डर लगे

इस क़दर नाज़ुक वो गुल अंदाम है... ग़ज़ब की कारीगरी 

उम्दा ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद जनाब समर साहब |

Comment by Samar kabeer on January 1, 2018 at 2:53pm

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Samar kabeer on January 1, 2018 at 2:51pm

जनाब संदीप कुमार जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Samar kabeer on January 1, 2018 at 2:50pm

जनाब अफ़रोज़ 'सहर' साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Samar kabeer on January 1, 2018 at 2:48pm

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Samar kabeer on January 1, 2018 at 2:46pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Samar kabeer on January 1, 2018 at 2:44pm

जनाब कालीपद प्रसाद मण्डल जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Samar kabeer on January 1, 2018 at 2:43pm

जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Samar kabeer on January 1, 2018 at 2:36pm

जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Vipin is now a member of Open Books Online
4 minutes ago
Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post मार ही दें न फिर ये लोग मुझे.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'मार ही दें न फिर ये…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on सचिन कुमार's blog post ग़ज़ल
"जनाब सचिन जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'नींद आंखों से हुई है आज…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post ग़ज़ल
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,ग़ज़ल अभी समय चाहती है, शिल्प और व्याकरण पर ध्यान देने की ज़रूरत है,…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on amita tiwari's blog post करोना -योद्धाओं के नाम
"मुहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
2 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-68 (विषय: संकटकाल)
"लघु- कथा कल मानव और विभा की शादी के दस वर्ष पूरे हो रहे थे। सो इस बार की मैरिज एनीवर्सरी विशेष थी।…"
6 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-68 (विषय: संकटकाल)
"आपका दिली आभार आदरणीय उस्मानी जी।नमन।"
7 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-68 (विषय: संकटकाल)
"सादर नमस्कार। बढ़िया सकारात्मक रचना। लेकिन  पिछली रचनाओं जैसी की प्रतीक्षा रहती है।"
8 hours ago
Kanak Harlalka replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-68 (विषय: संकटकाल)
"वाह..बहुत सुन्दर लघुकथा । हर व्यक्ति का अपना नजरिया होता है उसके भुक्तभोग के अनुसार.."
9 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-68 (विषय: संकटकाल)
"इंसान लोग ------------ ' आंटी के घर काम करने जाती है तू?' काम वाली बाई से सुरभि टीचर ने…"
10 hours ago
Samar kabeer and Chetan Prakash are now friends
10 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-68 (विषय: संकटकाल)
"आदाब। हार्दिक बधाई आदरणीय अनिल मकारिया जी गोष्ठी का आग़ाज़ बढ़िया उम्दा व विचारोत्तेजक रचना से करने…"
10 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service