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दिल आज उदास है // कान्ता राॅय

आईये पास कि दिल आज उदास है
आपकी आस में दिल आज उदास है

याद का भँवर उडा ले चला इस कदर
थाम लीजिए मुझे दिल आज उदास है


हाथ में आपकी हैं छुअन सी लगीं
घटा को देख फिर दिल आज उदास है


दिल का धडक जाना आपके नाम से
बदलियों को देख दिल आज उदास है


छतरी में सिमटना एक ठंडी शाम में
यादों में तनहा दिल आज उदास है

रूहानी तलाश रूह की जैसी प्यास
ढुंढना आस पास दिल आज उदास है

पूछना मुझसे नाम मेरे यार का
सिसकती दास्तान दिल आज उदास है

सपनों की मंडियाँ बिकते हुए सपने
देख कर तमाशा दिल आज उदास है

चाँदनी की चकमक चाँद का चमकना
खनकती चुड़ियाँ दिल आज उदास है

ख्वाहिश तुम्हें क्यों पर्दा नशी की
कर दे फना इश्क दिल आज उदास है

रिश्तों को तोलना बाजार क्या है
रौंदना इस कदर दिल आज उदास है

यादों की बूंदें गीला सा मन मेरा
नमकीन बरसात दिल आज उदास है


सूनी सी डगर गाँव के चौपाल में
चुप्पी हवाओं की दिल आज उदास है

इंतजार पल पल क्यों करें दिल मेरा
मुड़कर ना देखना दिल आज उदास है


सतरंगी सपना पलना युँ बार बार
ऐतबार क्युं कर दिल आज उदास है




कान्ता राॅय
मौलिक और अप्रकाशित

Views: 999

Comment

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Comment by kanta roy on July 14, 2015 at 7:52pm
हा हा हा हा ..... आपका भी जबाव नहीं आदरणीय विनय सर जी । सराहना के लिए हृदय तल से आभार आपको । आपकी उपस्थिति हमेशा मेरा हौसला बढाती है ।
Comment by विनय कुमार on July 14, 2015 at 6:59pm

रचना ये बहुत खास है , पता नहीं फिर क्यों लेखिका का दिल उदास है | बढ़िया रचना , बधाई आदरणीया कान्ता रॉय जी.

Comment by kanta roy on July 14, 2015 at 10:11am
सही पकडा है आपने आदरणीय मोहन सेठी ' इंतजार ' जी , यादों का भँवर जब उठता है तो दिल उदास हो जाता है । रचना को तवज्जो देने के लिए तहे दिल से आपकी आभारी हूँ ।
Comment by kanta roy on July 14, 2015 at 10:08am
हृदय तल से आभार आपको मनोज कुमार जी रचना को पसंद करने के लिए ।
Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on July 14, 2015 at 9:48am

आदरणीया kanta roy जी दिल से यादों की लहरें जब उठती हैं तो दिल उदास हो ही जाता है ....इस भावपूर्ण रचना के लिये बहुत बहुत बधाई ....सादर 

Comment by मनोज अहसास on July 14, 2015 at 8:36am
आदरणीया
बहुत भाव पूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई
सादर
Comment by kanta roy on July 14, 2015 at 7:50am
दिल तो बडा ही मूडी होता है ना आदरणीय प्रदीप जी कब क्या और क्यों यह खुश हो जाये या उदास हो जाये कोई ठिकाना नहीं इसका । नल में पानी नहीं , दुश्मनी में हानि नहीं जिंदगी में परेशानी नहीं ... दिल के उदास होने का कोई कारण नहीं .... ये दिल हर काम अकारण ही करता है इसलिए कहा गया है ना कि दिल तो पागल है । आभार आपको रचना पसंदगी के लिए ।
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on July 14, 2015 at 5:57am

सुन्दर भाव सजी रचना करी फिर भी दिल क्यों उदास है 

बधाई सादर आदरणीया कांता राय जी 

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