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मदिरा सवैया (महिला दिवस की अग्रिम शुभकामनाओं के साथ)

 (१ )

भारत की हम नार, बढ़ें खुद आज लिए नव छत्र चलो|

जीवन में अब हार, सहें मत ख़ार लिखें इक पत्र  चलो|

ले कर में पतवार, करें तट पार रचें नव सत्र चलो|

साथ मिला कर हाथ, सधे हर काज बने शतपत्र चलो||

 

(2)

जीवन में नित प्यार, रहे दरकार बढ़े  नव प्रीत चलो|

वर्ण मिलाकर आज, चलें इक साथ रचें इक  गीत चलो||

पाँव बढ़े इक साथ, सभी नर नार बनें सत मीत चलो|

एक नया इतिहास, लिखें हम आज मिले नव जीत चलो||

 

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

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Comment

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Comment by Vivek Jha on March 5, 2014 at 1:23pm
उम्दा भाव के साथ एक एक शब्द सटीकता के साथ पिरोई गई है जय हो जय हो
Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on March 5, 2014 at 1:14pm

आदरणीया राजेशकुमारीजी;

दोनों सवैया एक स्वर में पढ़ने में आनंद आया , अच्छी रचना , हार्दिक बधाई ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 5, 2014 at 1:12pm

मनोज कुमार मयंक जी, सवैये पर प्रथम ,सुन्दर प्रतिक्रिया, सराहना  हेतु हृदय तल से आभार आपका. 

Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on March 5, 2014 at 12:50pm

वाह कहें, अनयास सभी, नर नारि पढ़ें जब ये कविता|
बधाई हो आदरणीया...

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