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मन को दुर्बल क्यों करें'क्षणिक दीन अवसाद।
आगे देखो है खड़ा'आशा का आह्लाद।।

रिश्ते भी अब हो गये'ज्यों दैनिक अखबार।
आज पढ़ लिया प्रेम से'कल फिर से बेकार।।

ह्रदय प्रेम से भर गया'देखा अनुपम प्यार।
कामदेव दुन्दुभि लिये'आये मेरे द्वार।।

खुद को भी आवाज़ दे,खुद को ज़रा पुकार!
एक रात तू भी कभी,खुद के साथ गुजार।!

आप कहो कुछ मै कहूँ'बातें हो दो चार।
तुम खुश मैं भी खुश रहूँ'बना रहेगा प्यार।।
********************************************
राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by ram shiromani pathak on November 13, 2014 at 2:43pm

बहुत  बहुत आभार आदरणीय गिरिराज  जी///सादर  

Comment by ram shiromani pathak on November 13, 2014 at 2:43pm

अमूल्य सुझाव  हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी  जी///सादर 

Comment by ram shiromani pathak on November 13, 2014 at 2:41pm

बहुत  बहुत आभार आदरणीय विजय शंकर जी///सादर  

Comment by ram shiromani pathak on November 13, 2014 at 2:41pm

अमूल्य सुझाव व् अनुमोदन हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीया प्राची  जी///सादर  

Comment by ram shiromani pathak on November 13, 2014 at 2:39pm

अमूल्य सुझाव व् अनुमोदन हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीय लक्ष्मण जी///सादर  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 12, 2014 at 9:49am

प्रिय राम शिरोमणि जी 

सभी दोहों में बहुत सुन्दर बात कही है आपने...

तीसरे दोहे में आतंरिक शब्द संयोजन को एक बार पुनः अवश्य ही देखें और बताएं की गेयता क्यों और कहाँ बाधित हो रही है..पांचवे दोहे पर तो आदरणीय प्रधान सम्पादक जी बहुत स्पष्ट रूप में अपेक्षित सुधार इंगित कर ही चुके हैं.

आपको सतत गंभीर अभ्यास करते देखना बहुत सुखद लगता है.

शुभ कामनाएं 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 11, 2014 at 9:20am

खुद को भी आवाज़ दे,खुद को ज़रा पुकार!
एक रात तू भी कभी,खुद के साथ गुजार  -- बहुत खूब , आदरणीय राम भाई बधाइयाँ ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 10, 2014 at 9:44pm

दोहों पर बढ़िया प्रयास है विद्वद्जनो  के सुझाव काबिले गौर हैं जो आप अवश्य ठीक कर लेंगे ,हार्दिक बधाई आपको 

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 10, 2014 at 9:08pm

रिश्ते भी अब हो गये'ज्यों दैनिक अखबार।
आज पढ़ लिया प्रेम से'कल फिर से बेकार।
बहुत सुन्दर एवं सटीक दोहे हैं.रचना के लिए बधाई।

Comment by ram shiromani pathak on November 10, 2014 at 2:44pm
आदरणीय योगराज जी अमूल्य सुझाव हेतु बहुत आभार आपका।।सादर

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