For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

vineet agarwal
Share
 

vineet agarwal's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
chandausi u.p.
Native Place
chandausi
Profession
trade
About me
discovering my trueself

Vineet agarwal's Blog

और बेहतर कलाम क्या करते

तेरे पहलू में शाम क्या करते

उम्र तेरी थी , नाम क्या करते



तेरी महफ़िल में हम जो आ जाते

लोग किस्से तमाम क्या करते



आसमां तेरा ये जमीं तेरी

हम जो करते मुकाम क्या करते



होश में आते हम भला क्यूँ कर

सारे खाली थे जाम , क्या करते



कशमकश आग की उसूलों से

मौम के इंतजाम क्या करते



सच के फिर साथ चल नहीं पाए

झूठ पे थे इनाम, क्या करते



कांच का था ये दिल जो टूटा है

इत्तला खासोआम क्या करते



जब से होने लगे… Continue

Posted on October 2, 2010 at 2:11am — 3 Comments

Comment Wall (3 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

gumnaam pithoragarhi posted a blog post

गजल

212  212  212  22 इक वहम सी लगे वो भरी सी जेब साथ रहती मेरे अब फटी सी जेब ख्वाब देखे सदा सुनहरे दिन…See More
1 hour ago
gumnaam pithoragarhi commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"वाह शानदार गजल हुई है वाह .. "
1 hour ago
Usha Awasthi posted a blog post

सब एक

सब एक उषा अवस्थी सत्य में स्थित कौन किसे हाराएगा? कौन किससे हारेगा? जो तुम, वह हम सब एक ज्ञानी वही…See More
16 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"शंका निवारण करने के लिए धन्यवाद आदरणीय धामी भाई जी।"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, निम्न पंक्तियों को गूगल करें शंका समाधान हो जायेगा।//अपने सीपी-से अन्तर में…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। अच्छी समसामयिक गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post गज़ल
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कभी तो पढ़ेगा वो संसार घर हैं - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई इन्द्रविद्यावाचस्पति जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
yesterday
indravidyavachaspatitiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कभी तो पढ़ेगा वो संसार घर हैं - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"जमाने को अच्छा अगर कर न पाये, ग़ज़ल के लिए धन्यवाद।करता कहना।काश सभी ऐसा सोचते?"
yesterday
AMAN SINHA posted a blog post

किराए का मकान

दीवारें हैं छत हैंसंगमरमर का फर्श भीफिर भी ये मकान अपना घर नहीं लगताचुकाता हूँमैं इसका दाम, हर…See More
Saturday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service