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Kavita Verma
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Kavita Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 (विषय: ढहते क़िले का दर्द)
"mamata ka dard vaykti ko dhaha deta hai ..sundar rachna"
Jan 31, 2017
Kavita Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 (विषय: ढहते क़िले का दर्द)
"jhoothi shan ka dhahta kila behtareen katha .."
Jan 31, 2017
Kavita Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 (विषय: ढहते क़िले का दर्द)
"stri manobhavon ki sundar katha shashi ji "
Jan 31, 2017
Kavita Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 (विषय: ढहते क़िले का दर्द)
"मजबूरी  जवानी में शौक शौक में लगी आदत जल्द ही लत बन शरीर को खोखला कर गई। निशक्त जर्जर शरीर बिस्तर पर पड़े पड़े अब उन दिनों को याद करता है जब जीने के रंगीन सपने देखे थे। पढाई कर अच्छी नॉकरी शादी अपना घर बच्चे पहाड़ों पर घूमना और फोटोग्राफी करना।…"
Jan 31, 2017
Kavita Verma updated their profile
Jul 1, 2016
Kavita Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-15
"भूखे पेट का आक्रोश जब उमड़ता है तो सभी पर भारी पड़ता है सुंदर कथा। "
Jun 30, 2016
Kavita Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-15
"जी बदलाव की पहली सीधी भी हो सकती है सादर "
Jun 30, 2016
Kavita Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-15
"जी योगीराज सर बहुत दिनों बाद लघुकथा लिख रही हूँ  हुआ आपने कथा को समय देकर आकलन किया और गाइड किया आभारी हूँ।  आगे सुधार करने की कोशिश करूंगी "
Jun 30, 2016
Kavita Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-15
"वाह वास्तव में पागल ही वह कर सकता है जो सही है इंसान तो पागलों सी हरकत पर उतर आए हैं "
Jun 30, 2016
Kavita Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-15
"जो आक्रोश बरसों से रधिया के मन में था उसे आज शब्द मिल गए लेकिन सिर्फ शब्दों से तो कोई समाधान नहीं निकल सकता। "
Jun 30, 2016
Kavita Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-15
"आभार ओमप्रकाश क्षत्रिय जी इस प्रोत्साहन के लिए "
Jun 30, 2016
Kavita Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-15
"आभार विनय कुमार सिंह जी आपका प्रोत्साहन लेखन को आगे बढ़ाने में प्रेरक का कार्य करेगा "
Jun 30, 2016
Kavita Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-15
"आभार कांता जी आपके सहयोग से इसे प्रकाशित कर सकी। "
Jun 30, 2016
Kavita Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-15
"जनता और घर दोनों के आक्रोश को उभारती  लघुकथा।इसमें रिमोट  की संवेदना भी शामिल हो गई। बढ़िया "
Jun 30, 2016
Kavita Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-15
"आक्रोश  सरहद के समीप उस शहर में आए दिन आतंकवादियों की घुसपैठ होती रहती थी जिसके कारण सेना की बटालियनें हमेशा तैनात रहती। आए दिन तलाशी होती सेना का मार्च होता और बारूद की गंध हवा को बोझिल किए रहती। उस शहर के बाशिंदे दोतरफा मार झेलते।  एक ओर…"
Jun 30, 2016
Kavita Verma commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post लघुकथा : भुट्टे वाली (गणेश जी बागी)
"sahi kaha .."
Aug 7, 2014

Profile Information

Gender
Female
City State
indore madhya pradesh
Native Place
gadarwara
Profession
teacher
About me
simple person

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आस्था या अनास्था

जब से खबर आयी है माँ का चित्त स्थिर नहीं है तीन दिन तो बड़ी बैचेनी में गुजरे। बार बार दरवाजे तक जाती अकेली खड़ी सूनी सड़क को घंटों तकती रहती फोन की घंटी पर दौड़ पड़ती तो कभी कभी यूँ ही फोन को घूरती रहती कभी बिना घंटी बजे ही फोन उठा कर कान से लगा लेती देखने के लिए की कहीं फोन बंद तो नहीं है .देवघर में दीपक तो पहली खबर के साथ ही लगा दिया था बार बार जा कर उसमे तेल भरती जलती हुई बाती को उँगलियों से ठीक करती और दोनों हाथ जोड़ कर सर तक ले…

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Posted on July 10, 2013 at 2:00pm — 5 Comments

पागल

हाथ में पत्थर उठाये वह पगली अचानक गाड़ी के सामने आ गयी तो डर के मारे मेरी चीख निकल गयी. बिखरे बाल, फटे कपडे, आँखों में एक अजीब सी क्रूरता पत्थर लिए हाथ ऊपर ही रह गया.लेकिन जाने क्यों वह ठिठक गयी पत्थर फेंका नहीं उसने .गाड़ी जब उसके बगल से गुजरी खिड़की के बहुत पास से उसके चेहरे को देखा.अब वहां एक अजीब सा सूनापन था.
कार के दूसरी ओर से एक ट्रक निकल गया. वह कार के पीछे की ओर भागी और ट्रक पर पत्थर फेंक दिया.आसपास दुकानों पर खड़े लड़के हंस रहे थे.वह पगली थी घोषित…
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Posted on July 7, 2013 at 2:24pm — 7 Comments

सुविधा

सुविधा 
बेटा तुम्हारी माँ की तबियत ठीक नहीं है तुम्हे देखना चाहती है .पिता ने फोन पर बेटे से गुजारिश सी की।
हाँ पापा मुझे भी माँ को देखने आना है अगले हफ्ते दो छुट्टी हैं उसमे आने की सोच रहा था लेकिन रिजर्वेशन नहीं मिल रहा है।बेटे ने अपनी मजबूरी…
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Posted on May 9, 2013 at 1:02pm — 9 Comments

लघु कथा : ऑनर किलिंग

बेटी के शव को पथराई आँखों से देखते रहे वह.बेटी के सिर पर किसी का हाथ देख चौंक कर नज़रें उठाई तो देखा वह था. लोगों में खुसुर पुसुर शुरू हो गयी कुछ मुठ्ठियाँ भींचने लगीं इसकी यहाँ आने की हिम्मत कैसे हुई. ये देख कर वह कुछ सतर्क हुए आगे बढ़ते लोगों को हाथ के इशारे से रोका और उठ खड़े हुए. वह चुपचाप एक किनारे हो गया.

तभी अचानक उन्हें कुछ याद आया और वह अन्दर कमरे में चले गए. बेटी की मुस्कुराती तस्वीर को देखते दराज़ से वह…

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Posted on April 18, 2013 at 12:00am — 15 Comments

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