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मेघा राठी
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vijay nikore commented on मेघा राठी's blog post लघुकथा
"लघु कथा अच्छी लिखी है। हार्दिक बधाई।"
May 28, 2018
Mahendra Kumar commented on मेघा राठी's blog post लघुकथा
"उम्दा लघुकथा है आदरणीया मेघा राठी जी. हार्दिक बधाई प्रेषित है. सादर."
May 28, 2018
TEJ VEER SINGH commented on मेघा राठी's blog post लघुकथा
"हार्दिक बधाई आदरणीय मेघा जी। लाज़वाब लघुकथा।"
May 26, 2018
Neelam Upadhyaya commented on मेघा राठी's blog post लघुकथा
"आदरणीय मेघा राठी जी, नमस्कार।  प्रतीकात्मक और हृदयस्पर्शी रचना।  प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई।"
May 24, 2018
babitagupta commented on मेघा राठी's blog post लघुकथा
"आदरणीया दी,संकेतात्मक शैली में लडकी के बचाव में आई सभी निर्जीव वस्तुओं का दर्शाना ,यह संदेश प्रेषित करता हैं की सहयोग और समुकिकता से बढ़ते अपराधों को रोका जा सकता हैं,प्रस्तुत रचना के लिए ढेर सारी बधाइयां स्वीकार करे."
May 24, 2018
Sheikh Shahzad Usmani commented on मेघा राठी's blog post लघुकथा
"बहुत परिश्रम से तैयार की गई बढ़िया प्रतीकात्मक/मानवेत्तर शैली की लघुकथा के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरमा मेघा राठी जी। थोड़ा और समय देकर कहीं-कहीं स्पष्टता बढ़ाई जा सकती है। कोठे की सभी निर्जीव चीज़ों को प्रतीक व मानवीकरण द्वारा…"
May 24, 2018
मेघा राठी posted a blog post

लघुकथा

नियति का अंतप्लास्टर उतरी दीवारें खुद को अश्लील पोस्टरों में लपेटे कमरे में गुड़ी - मुड़ी पड़ी देह को खामोशी से देख रहीं थीं। दीवारों की सीलन सिसकियों के शोर के साथ गहरी होती जा रही थी।" ओहो, तो तुम कौन सा पहली बार ऐसा होते देख रही हो! इतने सालों में न जाने कितनी ही बार तुमने ये सब देखा है", बन्द दरवाजे ने रुआंसी होती दीवारों को देखकर कहा। " पहले तो कभी तुम लोगों को ऐसा परेशान होते नही देखा!"" चुप कर ! जन्म से यही दुनिया तो देखी थी, लगता था यही नियति होती है। मगर रात में सिसकती मजबूरियों ने जब…See More
May 23, 2018
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Nov 30, 2017
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Nov 30, 2017
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Nov 30, 2017
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Nov 30, 2017
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Nov 30, 2017
मेघा राठी replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"आभार"
Nov 30, 2017

Profile Information

Gender
Female
City State
भोपाल मध्य प्रदेश
Native Place
झाँसी
Profession
गृहणी
About me
लिखने और पढ़ने की शौकीन हूँ। नए विचार जानना और मनन करना पसंद है रवि

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At 9:09am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 6:26pm on August 30, 2017, मेघा राठी said…
हार्दिक आभार आदरणीया सीमा जी
At 10:50pm on August 29, 2017, Seema Singh said…
सुस्वागतम मेघा जी।

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लघुकथा

नियति का अंत

प्लास्टर उतरी दीवारें खुद को अश्लील पोस्टरों में लपेटे कमरे में गुड़ी - मुड़ी पड़ी देह को खामोशी से देख रहीं थीं। दीवारों की सीलन सिसकियों के शोर के साथ गहरी होती जा रही थी।

" ओहो, तो तुम कौन सा पहली बार ऐसा होते देख रही हो! इतने सालों में न जाने कितनी ही बार तुमने ये सब देखा है", बन्द दरवाजे ने रुआंसी होती दीवारों को देखकर कहा। " पहले तो कभी तुम लोगों को ऐसा परेशान होते नही देखा!"

" चुप कर ! जन्म से यही दुनिया तो देखी थी, लगता था यही नियति होती है। मगर रात में…

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Posted on May 23, 2018 at 6:51pm — 6 Comments

 
 
 

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