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राजकिशोर मिश्र 'राज' प्रतापगढ़ी
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राजकिशोर मिश्र 'राज' प्रतापगढ़ी's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश भारत
Native Place
प्रतापगढ़ 'अवध' उत्तर प्रदेश भारत
Profession
लेखन
About me
मैं एक लेखक हूँ लेखन मेरा शौक - शब्द -शब्द की मणिका पिरो का बनाता हूँ छंद, यति गति अलंकारित भावों से उदभित रसना का माधुर्य भाव ही मेरा परिचय है-

दुर्मिल सवैया=

दुर्मिल सवैया=====
मन मे हरि आय जगाय गये कछु चाह निदान बताय गये /
रसना रस मे हरि प्रीति लसे ,मन काम विराम लगाय गये/
तन आग बुझी मन आश् जगी , छवि राम प्रसाद सजाय गये/
भवसागर गागर मे लपकी ,शिव नैन सरोज चढ़ाय गये /
राजकिशोर मिश्र 'राज' ----

Comment Wall (2 comments)

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At 10:16pm on February 7, 2016, Archana Tripathi said…
नमस्कार आदरणीय राजकिशोर मिश्र जी,बड़ी प्रसन्नता हुई ओबीओ के मंच पर किसी प्रतापगढ़ी को देखकर।स्वागत हैं आपका।
At 1:06am on February 4, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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राजकिशोर मिश्र 'राज' प्रतापगढ़ी's Blog

कल्पवृक्ष

सागर मंथन जब हुआ , निकले चौदह रत्न/

कल्पवृक्ष उद्भव हुआ , दानव देव प्रयत्न /
============================
कल्पवृक्ष महिमा अमित , सदा जवानी देत /
मनोकामना पूर्ण कर , करे बुढ़ापा खेत /
============================
सतभामा कहने लगी, सुनिए मेरे नाथ /
पारिजात को लाइए , बैठूं प्रियतम साथ /
==========================
राजकिशोर मिश्र 'राज' प्रतापगढ़ी 

Posted on August 7, 2016 at 4:09pm

शक्ति छ्न्द, मुक्तक (धरती)

(१) शक्ति छ्न्द=== इस छ्न्द मे १, ६, ११ , एवम् १६ लघु होता है /

=========================================

मापनी १२२ १२२ १२२ १२



ज़मीं पे सितारे थिरकने लगे /

मनो भाव बन कर मचलने लगे /

लिखे राज मुक्तक मगन मन सुधा/

सुमन गीत बनकर महकने लगे //

=============================

(२)मापनी= १२२२ १२२२ १२२२ १२२२

लगाओ पेड़ धरती पर     करो खुशहाल अब धरती /

बिछाओ फूल चुन चुन कर  यही घर घर खुशी भरती/

घटाएँ भी बहर बन के       करें…

Continue

Posted on February 19, 2016 at 2:30pm — 3 Comments

 
 
 

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