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OBO लाइव तरही मुशायरा (236)

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प्रधान संपादक

OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (एक रपट)

आदरणीय साथियो, ओपनबुक्स ऑनलाइन के मंच से श्री राणा प्रताप सिंह द्वारा OBO लाइव तरही मुशायरा-५ का आयोजन दिनांक २० नवम्बर से २३ नवम्बर तक आय…

Started by योगराज प्रभाकर

32 Nov 30, 2010
Reply by Abhinav Arun

सदस्य टीम प्रबंधन

OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

आत्मीय स्वजन, पिछले दिनों OBO लाइव महाइवेंट ने एक नया इतिहास रचा है और कई नए फनकारों को भी इस परिवार से जोड़ा है| यूँ तो पहले से नियत तिथियो…

Started by Rana Pratap Singh

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

सदस्य टीम प्रबंधन

OBO लाइव तरही मुशायरा-4 (Now Close)

आत्मीय स्वजन, मुशायरे ३ की अपार सफलता के बाद एक बार फिर से नई उर्जा के साथ अगले मुशायरे के लिए नया मिसरा लेकर हाज़िर हूँ| चाहा तो था कि इस…

Started by Rana Pratap Singh

268 Oct 5, 2010
Reply by योगराज प्रभाकर

सदस्य टीम प्रबंधन

OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

इस बार का तरही मिसरा 'बशीर बद्र' साहब की ग़ज़ल से लिया गया है| "ज़िंदगी में तुम्हारी कमी रह गई" वज्न: 212 212 212 212 काफिया: ई की मात्रा र…

Started by Rana Pratap Singh

380 Sep 23, 2010
Reply by योगराज प्रभाकर

सदस्य टीम प्रबंधन

OBO लाइव तरही मुशायरा-२ ( Closed Now )

इस बार का तरही मिसरा| "उन्ही के कदमों में ही जा गिरा जमाना है" वज्न: १२१२१२१२१२१२२२ काफिये के मामले में आप स्वतंत्र है बस इतना ध्यान रखें क…

Started by Rana Pratap Singh

97 Sep 15, 2010
Reply by Navin C. Chaturvedi

सदस्य टीम प्रबंधन

OBO लाइव तरही मुशायरा-1( closed Now )

तरही मिसरा 'हाफिज़ नासिर' की मशहूर ग़ज़ल का इक मिसरा "तूने क्या मुझको मुहब्बत में बना रक्खा है " वज्न- २१२२११२२११२२२२ काफिया- आ की मात्रा र…

Started by Rana Pratap Singh

48 Sep 9, 2010
Reply by Navin C. Chaturvedi

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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"शंका निवारण करने के लिए धन्यवाद आदरणीय धामी भाई जी।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, निम्न पंक्तियों को गूगल करें शंका समाधान हो जायेगा।//अपने सीपी-से अन्तर में…"
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"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। अच्छी समसामयिक गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
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"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
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"आ. भाई इन्द्रविद्यावाचस्पति जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
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indravidyavachaspatitiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कभी तो पढ़ेगा वो संसार घर हैं - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"जमाने को अच्छा अगर कर न पाये, ग़ज़ल के लिए धन्यवाद।करता कहना।काश सभी ऐसा सोचते?"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post केवल बहाना खोज के जलती हैं बस्तियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, स्नेह व सुझाव के लिए आभार। "
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