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निर्धन की बेटियों को तू हल्दी लगा के देख

सौजन्य से ----जगदीश तपिश
sukavi babu ghayal devwal ki prastuti

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Comment by Rash Bihari Ravi on August 26, 2010 at 7:02pm
bahut badhia

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 23, 2010 at 8:39am
बहुत ही खुबसूरत और मन को छू लेने वाली ग़ज़ल है, बड़े ही जिन्दादिली से पढ़ी गई है, शानदार,

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