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मनोज अहसास
  • 40, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आ. भाई मनेज जी, अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Feb 14
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"बहुत बहुत आभार आदरणीय वर्मा जी सादर"
Feb 14
Shyam Narain Verma commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Feb 11
मनोज अहसास posted blog posts
Jan 30
मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

2×15कोशिश इतनी भी मत कीजे यादों को झुठलाने में ।आँखों मे आँसू भर जायेगे ज्यादा मुस्काने में।और भी कोई चीज़ बची है क्या तेरे मैखाने में,सारे ग़म तो मिला दिए तूने मेरे पैमाने में।बरस हज़ारों बीत गए हो जैसे तुझको देखे बिना,बीस साल की गिनती तो मैं गिनता हूँ अनजाने में।कोई फैसला लिखने बैठेगा तो उससे पूछूगा,सारी गवाही पूरी हैं या देर है उनके आने में।इतना पता मिल जाता बस वो सही सलामत रहते हैं,अब तो लाख तरीके हैं खबरें लाने ले जाने में।वो दिलकश मुस्कान निगाहों से ओझल होती ही नहीं,दुनिया ने तो कोई कसर न…See More
Jul 12, 2023
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"बहुत बहुत आभार आदरणीय श्याम जी सादर"
Jul 12, 2023
Shyam Narain Verma commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Jul 10, 2023
मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

1222   1222  1222   1222वही इक ख्वाब तो अपनी निगाहों ने भी देखा था।हमारे पास कोशिश थी,तुम्हारे पास पैसा था।तुम्हारे हक़ में आया फैसला तो कैसा अचरज हो,मेरी आँखों में मिन्नत थी, तेरे कदमों का रुतबा था।कहीं से भी नहीं लगता तेरी हस्ती से अब संगदिल,यही वो शख्स है मैं जिसके ख़्वाबों में भी रहता था।तेरा रुख ऐसा होगा ये अगर महसूस हो जाता,कभी भी मैं नहीं कहता तू मुझसे प्यार करता था।रिहाई जाने कब होगी मेरी अनचाही दुनिया से,फलक पर पंछियों का झुंड मैंने उड़ते देखा था।सिमट कर रह गई है ज़िन्दगी छोटे से कमरे…See More
Jul 10, 2023
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय मुसाफिर जी सादर नमस्कार  ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया और सुझाव देने हेतु हार्दिक आभार सादर"
Jun 22, 2023
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास :इस्लाह के लिए
"आदरणीय मुसाफिर जी  ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया हेतु आपका हार्दिक आभार सुझाव का स्वागत है सादर"
Jun 22, 2023
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय नीलेश जी ग़ज़ल पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार आप आये हौसला बढ़ गया मेरा सादर"
Jun 22, 2023
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय मिथिलेश जी, आदरणीय नीलेश जी,आदरणीय सौरभ पांडेय जी इस ग़ज़ल पर आप तीनों की उपस्थिति देखकर बहुत हर्ष हुआ obo के शुरुआती दिन याद आ गए जितना सीखा आप लोगों के सानिध्य में ही सीखा ग़ज़ल पर आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत सुधार की कोशिश जारी…"
Jun 22, 2023

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"भाई मनोज अहसास जी, आपकी प्रस्तुति का हार्दिक धन्यवाद।  गजल कही जाती है, लिखते तो हम आप हैं।   यह गजल कुछ और समय चाहती है।  शुभ-शुभ  "
May 22, 2023
Nilesh Shevgaonkar commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आ. मनोज जी,मतले के दोनों मिसरों में अंतर्संबंध कम है ..  डगमगाते दौर... यह पहली बार पढ़ने में आया है .. आश्वस्त नहीं हूँ .कैसे कोई पढ़ सकेगा  मैं जो लिख पाया नहीं.अब अगर तुम आ भी जाओ तो भी क्या हो जाएगामैं नहीं मैं तुम नहीं तुम वक़्त…"
May 18, 2023
Nilesh Shevgaonkar commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आ मनोज जी, अभी विस्तृत टिप्पणी नहीं कर पा रहा हूं। संक्षेप में यह कि बहर 11212, 11212, 11212, 11212 के करीब है। दूसरे, मुझे भूलने का ख़्याल क्यूं, यह आधा मिसरा पूरी ग़ज़ल में बढ़ा हुआ है। न भी होता तो भी ग़ज़ल पूरी हो जाती। सादर"
May 18, 2023

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज अहसास जी, बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने. शेर-दर-शेर दाद ओ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं.  प्रचलित हिंदी और देवनागरी में 'ज्यादा'  शब्द रूप घुल मिल गया है. अब तो ये स्थिति है कि अगर जियादः लिखेंगे तो साथ में अर्थ भी देने की…"
May 16, 2023

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saharanpur uttarpradesh
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India
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Gazal sikhna chhahta hu

मनोज अहसास's Blog

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

1222   1222   1222   1222

हमारा जिक्र छोड़ो आप कुछ अपनी कहो, बोलो ।

बहुत दिन बाद आये ख़्वाब में कहदो उठो,बोलो।

फिसलते वक़्त की गिनती ने हमको कर दिया गंभीर,

मगर माँ बाप कहते हैं कि बच्चे हो हँसो, बोलो।

कहीं पर सामना हो जाए तेरा मैं रहूँ खामोश,

तेरी आँखे बहे,मुझसे कहें,तुम भी…

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Posted on January 28, 2024 at 11:07pm — 3 Comments

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

1222   1222   122

1

मुझे महसूस करते थे खुशी से

मगर ये अब न कहना तुम किसी से

2

मुझे चाहत नहीं है अब किसी की

मुझे चाहत रही है पर सभी से

3

तुम्हारा नाम ही था कॉल में पर

मैं बातें कर रहा था अजनबी से

4

तनाफुर दिखता होगा शेर में अब

मैं शायद थक चुका हूँ शाइरी से

5

मैं अपने ग़म में ही मदहोश हूँ पर

हमें काफिर रिझाते मयकशी से

6

शुतुरगर्बा जबां पर आ गया है

बिठायें संतुलन कैसे सभी से

7

ये ज़ख़्मी शब्द हैं खामोश,रीते

तुझे…

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Posted on January 28, 2024 at 10:05pm

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

2×15

कोशिश इतनी भी मत कीजे यादों को झुठलाने में ।

आँखों मे आँसू भर जायेगे ज्यादा मुस्काने में।

और भी कोई चीज़ बची है क्या तेरे मैखाने में,

सारे ग़म तो मिला दिए तूने मेरे पैमाने में।

बरस हज़ारों बीत गए हो जैसे तुझको देखे बिना,

बीस साल की गिनती तो मैं गिनता हूँ अनजाने में।

कोई फैसला लिखने बैठेगा तो उससे पूछूगा,

सारी गवाही पूरी हैं या देर है उनके आने में।

इतना पता मिल जाता बस वो सही सलामत रहते हैं,

अब तो…

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Posted on July 12, 2023 at 12:02am

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

1222   1222  1222   1222

वही इक ख्वाब तो अपनी निगाहों ने भी देखा था।

हमारे पास कोशिश थी,तुम्हारे पास पैसा था।

तुम्हारे हक़ में आया फैसला तो कैसा अचरज हो,

मेरी आँखों में मिन्नत थी, तेरे कदमों का रुतबा था।

कहीं से भी नहीं लगता तेरी हस्ती से अब संगदिल,

यही वो शख्स है मैं जिसके ख़्वाबों में भी रहता था।

तेरा रुख ऐसा होगा ये अगर महसूस हो जाता,

कभी भी मैं नहीं कहता तू मुझसे प्यार करता था।

रिहाई जाने कब…

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Posted on July 10, 2023 at 1:06am — 2 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 9:21pm on October 23, 2015, DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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