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जयनित कुमार मेहता
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Samar kabeer commented on जयनित कुमार मेहता's blog post अपना इक मेयार बना (ग़ज़ल)
"जनाब जयनित कुमार मेहता जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'फिर उसमें तू धार बना' इस मिसरे को उचित लगे तो यूँ कहें:- 'फिर उनकी तू धार बना' 'बेवकूफ़ियाँ बढ़ती गयीं' ये मिसरा बह्र में नहीं है, देखिएगा…"
8 hours ago
जयनित कुमार मेहता posted a blog post

अपना इक मेयार बना (ग़ज़ल)

लफ़्ज़ों को हथियार बना फिर उसमें तू धार बनाछोड़ तवज़्ज़ो का रोना अपना इक मेयार बनालंबा वृक्ष बना ख़ुद को लेकिन छायादार बनाबेवकूफ़ियाँ बढ़ती गयीं जितना बशर हुश्यार बनाशिकवा गुलों से है न तुझे? तो कांटों को यार बनाजिसने दिखाई राह नई वो दुनिया का शिकार बना(मौलिक एवं अप्रकाशित)See More
yesterday
जयनित कुमार मेहता commented on मिथिलेश वामनकर's blog post ग़ज़ल: उम्र भर हम सीखते चौकोर करना
"आदरणीय मिथिलेश जी, सादर नमस्कार! अच्छी ग़ज़ल हुई है। ख़ूब मुबारकबाद आपको। एक जिज्ञासा है - क्या ज़ेहन का वज़न 122 लिया जा सकता है?"
Thursday
जयनित कुमार मेहता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीया ऋचा जी, सादर नमस्कार! तरही मिसरे पर बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने। मुशायरे में सहभागिता हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें। 5वें शेर पर आदरणीय अमित जी का सुझाव भी बहुत ख़ूबसूरत है। सादर।"
May 25
जयनित कुमार मेहता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, सादर नमस्कार! तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें। आदरणीय अमित जी के सुझावों पर ग़ौर कीजियेगा। सादर।"
May 25
जयनित कुमार मेहता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय संजय जी, सादर अभिवादन! उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभारी हूँ।"
May 25
जयनित कुमार मेहता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय आज़ी तमाम जी, सादर नमस्कार! तरही मिसरे पर बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। हार्दिक बधाई स्वीकार करें। आदरणीय अमित जी के सुझाव क़ाबिल -ए -ग़ौर हैं। सादर।"
May 25
जयनित कुमार मेहता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय दिनेश कुमार विश्वकर्मा जी, सादर नमस्कार! तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें। आदरणीय अमित जी ने उपयोगी सुझाव प्रस्तुत किये हैं। 8वें शेर को थोड़ा और असरदार बनाने की कोशिश में मेरे मन में एक सुझाव आया, जो पेश कर…"
May 25
जयनित कुमार मेहता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी, सादर अभिवादन! ग़ज़ल का प्रयास बहुत अच्छा हुआ है। मुशायरे के सहभागिता के लिए हार्दिक बधाई आपको।"
May 25
जयनित कुमार मेहता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय लक्ष्मण जी, सादर अभिवादन! ग़ज़ल तक आने एवं उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभारी हूँ।"
May 25
जयनित कुमार मेहता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय आज़ी तमाम जी, सादर अभिवादन! ग़ज़ल तक आपकी पहुंच और हौसला अफजाई के लिए बेहद शुक्रगुजार हूं।"
May 25
जयनित कुमार मेहता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी, सादर अभिवादन! ग़ज़ल तक पहुंचकर उत्साहवर्धन करने हेतु आपका हार्दिक आभारी हूं।"
May 25
जयनित कुमार मेहता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीया ऋचा जी, सादर अभिवादन। ग़ज़ल तक पहुँचने एवं उस्ताहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभारी हूँ।"
May 25
जयनित कुमार मेहता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय अमित जी, सादर अभिवादन!  ग़ज़ल तक पहुँचने एवं उचित मार्गदर्शन हेतु आपका कोटि कोटि धन्यवाद। आपने तीसरे शेर में जो कर्ता सम्बन्धी प्रश्न किया है, उसके उत्तर में मैं जनाब "फैज़ अहमद फैज़ " साहब का एक शेर उद्धृत करना चाहूँगा। उपर्युक्त…"
May 25
जयनित कुमार मेहता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीया रचना भाटिया जी, सादर नमस्कार। आपने उचित प्रश्न पूछा है, जिससे एक सार्थक चर्चा की सम्भावना उत्पन्न हुई है। जहाँ तक मेरी समझ है, मतले में काफ़िया तय करने के बाद हुस्ने मतला में इस तरह की छूट लेते हुए कुछ नामचीन शायरों की ग़ज़ल मेरी नज़र से गुज़री…"
May 24
जयनित कुमार मेहता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"आदरणीय अमित जी, सादर नमस्कार! खूबसूरत ग़ज़ल के साथ मुशायरे का आगाज़ करने के लिए आपको हार्दिक बधाई!"
May 24

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Araria,Bihar
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जयनित कुमार मेहता's Blog

अपना इक मेयार बना (ग़ज़ल)

लफ़्ज़ों को हथियार बना
फिर उसमें तू धार बना

छोड़ तवज़्ज़ो का रोना
अपना इक मेयार बना

लंबा वृक्ष बना ख़ुद को
लेकिन छायादार बना

बेवकूफ़ियाँ बढ़ती गयीं
जितना बशर हुश्यार बना

शिकवा गुलों से है न तुझे?
तो कांटों को यार बना

जिसने दिखाई राह नई
वो दुनिया का शिकार बना

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on July 9, 2024 at 7:53pm — 1 Comment

इक वह्म ऐतबार से आगे की चीज़ है (ग़ज़ल)

 221  2121  1221  212

ख़ुशबू, चमन, बहार से आगे की चीज़ है।

जो ज़िंदगी है, प्यार से आगे की चीज़ है।

जारी है एक जंग जो ग़म और ख़ुशी के बीच,

यह जंग जीत-हार से आगे की चीज़ है।

अक्सर उफ़ुक़ को देख के आता है ये ख़याल,

कुछ है जो इस हिसार से आगे की चीज़ है।

कैसे बताऊं किस पे टिकी है मेरी निगाह,

मंज़िल से, रहगुज़ार से आगे की चीज़ है।

हद्द-ए-निगाह से भी परे है कोई वजूद,

इक वह्म ऐतबार से आगे की चीज़…

Continue

Posted on September 15, 2022 at 10:30am — 7 Comments

साज-श्रृंगार व्यर्थ है तेरा (ग़ज़ल)

2122   1212   22

जितना बढ़ते गए गगन की ओर
उतना उन्मुख हुए पतन की ओर

साज-श्रृंगार व्यर्थ है तेरा
दृष्टि मेरी है तेरे मन की ओर

फल परिश्रम का तब मधुर होगा
देखना छोड़िए थकन की ओर

मन को वैराग्य चाहिए, लेकिन
तन खिंचा जाता है भुवन की ओर

"जय" भी एकांतवास-प्रेमी है
इसलिए आ गया सुख़न की ओर

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on September 4, 2022 at 1:25am — 7 Comments

निकलेगा आफ़ताब इसी आसमान से (ग़ज़ल)

221   2121  1221  212

क़ीमत ज़बान की है जहाँ बढ़के जान से

है वास्ता हमारा उसी ख़ानदान से

चढ़ना है गर शिखर पे, रखो पाँव ध्यान से

खाई में जा गिरोगे जो फिसले ढलान से

पल - पल झुलस रही है ज़मीं तापमान से

मुकरे हैं सारे अब्र अब अपनी ज़बान से

काली घटाएँ रास्ता रोकेंगी कब तलक?

निकलेगा आफ़ताब इसी आसमान से

ये दौलतों के ढेर मुबारक तुम्हीं को हों

हम जी रहे हैं अपनी फ़क़ीरी में शान से

क्या-क्या न हमसे छीन…

Continue

Posted on August 25, 2018 at 11:03am — 8 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 11:19am on November 6, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय जयनित जी जन्‍म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं

At 12:59pm on January 27, 2016, kanta roy said…

बेहद गर्व का पल  ! बहुत -बहुत बधाई आपको आदरणीय जयनित  जी  "महीने का सक्रिय सदस्य"  बनने हेतु। 

At 8:17pm on January 16, 2016, जयनित कुमार मेहता said…
आदरणीय गणेश जी,
इस सम्मान के लिए मैं OBO परिवार के प्रति हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ।
At 8:13pm on January 16, 2016, जयनित कुमार मेहता said…
जन्मदिवस की शुभकामनाओं के लिए आपका बहुत-बहुत आभारी हूँ,आदरणीय रवि शुक्ला जी..

(विलम्ब से प्रत्युत्तर के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ)
At 4:28pm on January 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

जयनित कुमार मेहता जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:26pm on November 6, 2015, Ravi Shukla said…

जयनित जी जन्‍म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं

 
 
 

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"सादर प्रणाम आदरणीय समर कबीर सर । उत्साहवर्धन हेतु बहुत बहुत आभार ।"
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"जनाब अशोक रक्ताले जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभारी हूँ ।"
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