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चारण हूँ मद्दाह नहीं मैं सच लिक्खूंगा-बोलूँगा - बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’

S S S S S S S S S S S S S S S

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देश के दुश्मन सबके दुश्मन इनसे यारी ठीक नहीं|
इनसे हाथ मिलाने वालों यह गद्दारी ठीक नहीं|

मंदिर-मस्ज़िद-धर्मों-मज़हब रक्षित औ महफूज़ हैं फिर
इनकी खातिर गोलीबारी -तेग-कटारी ठीक नहीं

माँ की अस्मत ख़तरे में औ मुल्क में हो गर त्राहिमाम
तब तो लोग कहेंगे दिल्ली की सरदारी ठीक नही।

आरक्षण की ख़ातिर ही अंधे-बहरे कुर्सी पर हैं
इस हालत से देश की होगी कुई बीमारी ठीक नहीं|

चारण हूँ मद्दाह नहीं मैं सच लिक्खूंगा-बोलूँगा
काम करो या कुर्सी छोडो अब मक्कारी ठीक नहीं|

फाँसी पर लटका दो या फिर दफ़ना दो गद्दारों को
केसर क्यारी के मुद्दों पर ठेकेदारी ठीक नहीं|

पत्थरवाज़ो की माफ़ी से मुल्क मेरा शर्मिन्दा है
कुर्सी खातिर जुल्म को सहना औ लाचारी ठीक नहीं|

'भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह'
कहने वाले गद्दारों से नातेदारी ठीक नही।

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गज़ल- मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on February 11, 2019 at 11:17pm

आदरणीय लक्ष्मण साहेब .......नमन व शुक्रिया 

Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on February 11, 2019 at 11:16pm

आदरणीय समर साहेब ....नमन व शुक्रिया ...............आप बिलकुल सही हरमा रहे हैं 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 5, 2019 at 7:09am

आ. मिंंटू जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on February 4, 2019 at 9:51pm

जनाब मिंटू जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।

'मंदिर-मस्ज़िद-धर्मों-मज़हब रक्षित औ महफूज़ हैं फिर'

'धर्म' और 'मज़हब' तो एक ही हैं न?

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