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'डस्ट-मून्ज़' (लघुकथा)

"देखो, हम सेलिब्रिटीज़ की ज़िन्दगी के साथ मीडिया ऐसे ही बर्ताव करता रहता है! टेंशन मत लो!"
"सब कुछ मेंशन हो चुका है! तुम तो सिर्फ़ यह बता दो कि मैं तुम्हारा पहला चांद हूं या दूसरा या फिर तीसरे नंबर का?"
"क्या मतलब?"
"देखो अर्थ! अब ज़्यादा मत इतराओ! मैंने भी तुम्हारी उन दोनों लैलाओं के बयान सुन लिए हैं टेलीविज़न पर!"
"देखो शशि! मुझ पर और तुम स्वयं पर विश्वास रखो! तुम्हीं मेरा पहला और आख़री चांद हो, तुम्हीं इंदु, विधु और तुम्हीं मेरी चंदा हो डार्लिंग!"
"फ़िर वे दोनों कौन हैं, जो तुम पर शोषण, हरेशमंट या रैप के इल्ज़ाम सरेआम लगा रहीं हैं!"
"यूं समझ लो कि वे तुम्हारे प्रिय अर्थ के चक्कर लगाकर उससे ही रौशन 'डस्ट-मून्ज़' जैसी ही हैं, जो विज्ञान-जगत की तरह फ़िल्मी-दुुनिया और मीडिया की दुनिया में विवादित ही रहती हैं, प्रमाणित नहीं!"
"होश में तो हो न! वैज्ञानिकों ने अभी हाल में प्रमाणित कर दिया है कि 'अर्थ' के तीन मून हैं... और यहां मीडिया में भी कोर्ट में साबित करने की धमकियां हैं कि तुम्हारे भी दो और मून हैं!"
"रो मत पगली! ऐसे डस्ट-मून्ज़ की कोई औक़ात नहीं होती! बनते-बिगड़ते और बिखरते रहते हैं हम सेलिब्रिटीज़ के चारों ओर!"
"देखो अर्थ! मैं तुम्हें ऐसे प्रदूषण से मुक्त कराना चाहती हूं, प्लीज़ लीव देम!"
"प्रदूषण नहीं पगली! हमारी फ़ील्ड में वो सब नेचुरल है! 'सेलिब्रिटीज़-फोर्स' है 'पृथ्वी' के गुरुत्वाकर्षण माफ़िक, बस! तरक़्क़ी के कोर्स के सोर्स हैं और कुछ नहीं!"
"चुप रहो अर्थ! तुम्हारी वे डस्ट-मून्ज़ डिवोर्स की फोर्स, कोर्स और सोर्स भी तो हो सकती हैं, समझे!"
"मेरी चंदा, मेरी शशि! तुम तो सदा मेरे गुरुत्वाकर्षण में अपनी इसी 'ओरबिट' में रहोगी न! ये क़ुदरत की बनाई जोड़ी है जन्मों-जन्मों की!" यह कहते हुए अर्थ ने शशि को अपनी बाहों में भरते हुए कहा - "आइ लव यू शशि!"
"मी टू!" सिसकियों की जुगलबंदी के साथ शशि के ये शब्द अर्थ के कानों तक पहुंचे।


(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 12, 2018 at 2:30pm

मेरी इस ब्लॉग पोस्ट पर भी उपस्थित होकर पहली टिप्पणी, अनुमोदन और प्रोत्साहन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब समर कबीर  साहिब।

Comment by Samar kabeer on November 11, 2018 at 6:37pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 10, 2018 at 7:08pm
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 10, 2018 at 6:54pm

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