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मिर्ज़ा ग़ालिब की ज़मीन में एक कोशिश ।

'भर के आँखों में नमी लहज-ए-साइल बाँधा ।

उनसे मिलने जो चला साथ ग़म ए दिल बाँधा ।

उनकी तशबीह सितारों से न अशआर में दी ।

उनके रुख़सार पै जो तिल था उसे तिल बाँधा ।

मैं भँवर से तो निकल आया मगर मैरे लिए ।

एक तूफ़ान भी उसने लबे साहिल बाँधा ।

हौसले पस्त हुए पल में मिरे क़ातिल के ।

तीर के सामने जब सीन-ए- बिस्मिल बाँधा ।

लुत्फ़ अंदोज़ है "जावेद"तग़ज़्ज़ल कितना ।

हमने मोज़ू ए महब्बत को सलासिल बाँधा ।

मौलिक/अौर प्रकाशित  मिर्ज़ा जावेद बेग ।

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Comment by mirza javed baig on September 21, 2018 at 10:17pm

आली जनाब सौरभ पांडे जी आदाब 

मेरी ग़ज़ल को अपनी मुस्तनद दाद ओ तेहसीन से नवाज़ने 

के लिए दिल की अमीक़ गहराइयों से शुक्र गुज़ार हूं ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 21, 2018 at 3:04pm

आदरणीय मिर्ज़ा जावेद बेग़ जी, आपकी इस अच्छी ग़ज़ल पर दाद दे रहा हूँ.

शुभकामनाएँ व बधाइयाँ 

Comment by mirza javed baig on August 31, 2018 at 5:05pm

जनाब नरेंन्द्र सिंह चौहान जी आदाब 

ग़ज़ल को पसंद फ़रमा कर दादो तहसीन से नवाज़ने के लिए 

दिली शुक्रिया ।।

Comment by Samar kabeer on August 31, 2018 at 2:55pm

जनाब नरेन्द्र सिंह चौहान साहिब आदाब, आपसे पहले भी कई बार निवेदन कर चुका हूँ कि इस तरह की टिप्पणी ओबीओ मंच की परिपाटी नहीं है,ये सोशल मीडिया पर ही चलती होगी,ये सीखने सिखाने का पटल है, यहाँ पहले रचनाकार को पूरे सम्मान से संबोधित किया जाता है,फिर उसकी रचना की तारीफ़ या आलोचना शिष्टता के साथ की जाती है,उदाहरण स्वरूप इसी ग़ज़ल पर आई हुई टिप्पणियां देखें ,उम्मीद है मेरी बात को संज्ञान में लेंगे ।

Comment by Samar kabeer on August 31, 2018 at 2:45pm

//

महब्बत का रहे बस हाथ सर पे

मुझे इस पेड़ का साया बहुत है//

अच्छा शैर हुआ ।

Comment by mirza javed baig on August 31, 2018 at 12:10pm

मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब की ख़िदमत में

सलाम अर्ज़ करता हूं ।

आप जिस तरह से नौमश्क शौरा की हौसला अफ़ज़ाई करते हें 

यक़ीनन बे मिसाल है ।

आपकी बेलौस महब्बतों का हमैशा से ही क़ाइल हूं अपना एक शैर 

आपकी नज़्र करता हूं ।

महब्बत का रहे बस हाथ सर पे :-) 

मुझे इस पेड़ का साया बहुत है ।

Comment by narendrasinh chauhan on August 31, 2018 at 12:01pm
खुब सुन्दर रचना....हार्दिक बधाई.
Comment by mirza javed baig on August 31, 2018 at 12:01pm

जनाब अजय तिवारी जी आदाब 

तालिब इल्म की हौसला अफ़ज़ाई की आपने 

बेहद शुक्रगुज़ार हूं ।

Comment by mirza javed baig on August 31, 2018 at 11:58am

जनाब आरिफ़ भाई साहिब सुख़न नवाज़ी के लिए आपका तहे दिल से ममनून व मशकूर हूं ।

Comment by Mohammed Arif on August 31, 2018 at 9:04am

आदरणीय जावेद जी आदाब,

                     लाजवाब ग़ज़ल । हर शे'र पर दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।

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