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कुछ क्षणिकाएं :

कुछ क्षणिकाएं :

1

शुष्क काष्ठ
अग्नि से नेह
असंगत आलिंगन
परिणति
मूक अवशेष

................

2

त्वचा हीन
नग्न वृक्ष
अवसन्न खड़े
अकाल अंत की
आहटों के मध्य

.............................

3

ईश्वर
किसी देवता का
सर्जन नहीं
गढ़त है वो
इंसान की

..........................

4

करता रहा
प्रतीक्षा
एक शंख
नाद के लिए
चिर निद्रा में सोये
मरघट में
अपने स्वामी के
श्वास की

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Anamika singh Ana on June 22, 2018 at 6:39pm

आदरणीय सुशील सरना जी , बेहतरीन  क्षणिकाएं  रची हैं ।

Comment by Mahendra Kumar on June 22, 2018 at 3:51pm

बढ़िया क्षणिकाएँ हैं आदरणीय सुशील सरना जी। हार्दिक बधाई स्वीकर कीजिए। सादर। 

Comment by Neelam Upadhyaya on June 22, 2018 at 2:44pm

आदरणीय सुशील  सरना जी, अच्छी प्रस्तुति।  बधाई । 

Comment by narendrasinh chauhan on June 22, 2018 at 12:13pm

खुब सुन्दर

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